तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – प्रदीप दुबे
गाजीपुर। ‘साहित्य चेतना समाज’ के तत्वावधान में ‘चेतना – प्रवाह’ के अन्तर्गत देश के ख्यात मंच-संचालक, ‘गाजीपुर गौरव सम्मान’ से सम्मानित कवि हरिनारायण ‘हरीश’के तिलक नगर काॅलोनी स्थित आवास पर उनके 78 वें जन्मदिवस के अवसर पर एक ‘सरस काव्यगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समस्त कवियों के द्वारा माॅं वीणापाणि के चरणों में दीप-प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के उपरान्त चर्चित कवयित्री संज्ञा तिवारी की वाणी-वंदना से हुआ। युवा ग़ज़लगो गोपाल गौरव ने अपनी ग़ज़ल – “बिना कश्ती के कैसे जाओगे घर है नदी के पार उसका, उठो अब घर चलो ‘गौरव’ बहुत हुआ इन्तज़ार उसका।” सुनाकर अतीव प्रशंसा अर्जित की; तदुपरांत युवा नवगीतकार डॉ.अक्षय पाण्डेय ने कवि के 78वें जन्मदिन पर शताब्दी साहित्यकार बनने की मंगलकामना के साथ स्नेहिल बधाई दी। अपने वक्तव्य में हरीश जी के अवदान को रेखांकित करते हुए कहा कि “यदि डॉ.पी.एन.सिंह ने अपने समय-समाज को अकादमिक-संस्कार दिया है तो कवि हरीश ने अपने उत्कृष्ट संचालन के द्वारा भारतीय मंचों को एक श्रेष्ठ काव्यात्मक-संस्कार दिया है।” इसी के साथ ही डाॅ.पाण्डेय ने अपना नवगीत- “जन-मन में हो प्रीति प्रीति में जन-मन हो भाई! जीवन में हो गीत गीत में जीवन हो भाई!” सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इसी क्रम में कवयित्री संज्ञा तिवारी ने अपना गीत- “तुझे दिल में बसाना चाहती हूॅं। मगर कोई बहाना चाहती हूॅं।






