तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
ओबरा। नवंबर माह को यातायात जागरूकता अभियान के रूप में मनाया जा रहा है, लेकिन ओबरा में इस अभियान के बीच रविवार को हनुमान मंदिर चौराहे पर माहौल अचानक गरमा गया। हेलमेट और चालान को लेकर पुलिस व स्थानीय लोगों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। देखते ही देखते मौके पर भीड़ जुट गई और मामूली बहस तनावपूर्ण माहौल में बदल गई।चौराहे पर मौजूद दुकानदारों और छोटी दूरी पर आवागमन करने वाले लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस बिना परिस्थिति समझे लगातार चालान काट रही है। उनका कहना था कि बाज़ार क्षेत्र में घरों और दुकानों की नजदीकी के कारण हर समय हेलमेट पहनना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है, ऐसे में रोज–रोज चालान होने से आम जनता में रोष पनप रहा है।लोगों ने यह भी कहा कि अभियान का उद्देश्य जागरूकता होना चाहिए, न कि चौराहे को ‘चालान ज़ोन’ में बदल देना। भीड़ ने पुलिस से मांग की कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियम लागू हों, ताकि परेशानियों के बजाय समाधान निकल सके।उधर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों का कहना था कि प्रदेशभर में चल रहे अभियान के तहत नियमों का सख्त पालन अनिवार्य है। हेलमेट न पहनने, ट्रिपल राइडिंग, ओवरस्पीडिंग से लेकर ड्रिंक एंड ड्राइव तक—हर उल्लंघन पर कार्रवाई की निर्देश स्पष्ट हैं। पुलिस का तर्क था कि अगर कार्रवाई नहीं होगी तो सड़क हादसे नहीं रुकेंगे।लेकिन लोगों और पुलिस के बीच संवाद की कमी ने विवाद को हवा दे दी। कुछ देर तक दोनों पक्षों में तीखी बहस चलती रही। हालात बिगड़ते देख वरिष्ठ अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत कराया और आश्वासन दिया कि अभियान के दौरान आम लोगों को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाएगा।ओबरा की घटना ने साफ कर दिया है कि नियमों की सख्ती जरूरी है, मगर उससे भी ज्यादा जरूरी है—स्थानीय हालात को समझते हुए संवाद और संतुलन। सड़क सुरक्षा का लक्ष्य तभी सफल होगा जब नियम लागू करने वालों और नियम पालन करने वालों के बीच विश्वास बना रहे।






