तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
ओबरा, सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी में कृष्णा माइनिंग वर्क्स की पत्थर खदान धंसने से सात मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद आज खनन निदेशक माला श्रीवास्तव का पहला आधिकारिक दौरा हुआ। खान सुरक्षा निदेशालय ने क्षेत्र की कई खदानों को ‘डेंजर जोन’ घोषित कर खनन पर पूर्ण रोक लगा दी, लेकिन सबकी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए निदेशक ने हादसे वाली खदान का दौरा किए बगैर आसपास की अन्य खदानों का निरीक्षण किया।हादसे की भयावह तस्वीरें15 नवंबर को दोपहर करीब 3 बजे ड्रिलिंग के दौरान 300 फीट गहरी खदान में भूस्खलन हुआ, जिसमें 15 से ज्यादा मजदूर फंस गए। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें 52 घंटे तक रेस्क्यू में जुटी रहीं, मलबे से दो सगे भाइयों समेत सात शव बरामद हुए। खदान मालिक मधुसूदन सिंह फरार हो गए, बाद में गिरफ्तार हुए; माइंस मैनेजर और तीन पेटीदार भी जेल पहुंचे।निदेशक दौरे पर सवालों का दौरसभी की नजरें घटनास्थल पर टिकी थीं, लेकिन माला श्रीवास्तव ने सीधे हादसे वाली जगह छोड़ अन्य खदानों का जायजा लिया। स्थानीय खनन मालिकों और मजदूरों में रोष फैल गया – क्या यह जांच से बचने की चाल है? खान अधिकारी कमल कश्यप ने 37 खदानों को बंद किया, सर्वेयर योगेश शुक्ला को गाजियाबाद और निरीक्षक मनोज कुमार को प्रतापगढ़ ट्रांसफर कर दिया गया।सुरक्षा लापरवाही का खुलासा हादसे में नौ कंप्रेशर मशीनें ब्लास्टिंग के लिए सक्रिय थीं, सुरक्षा मानक धज्जियां उड़ गईं। जिला प्रशासन ने जांच समिति बनाई, घायलों की हालत स्थिर है। मजदूर परिवार रो रहे हैं लाइट की कमी, 5 घंटे बाद राहत टीम पहुंची!” खनन का जिला होने पर भी बेसिक सुविधाओं की कमी ने सवाल खड़े कर दिए।






