चोपन में धूमधाम से झलका पल्स पोलियो का संकल्प: समाजसेवियों ने बच्चों को पिलाई पहली खुराक, हजारों को मिलेगी सुरक्षा कवच!

तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

चोपन, सोनभद्र। 14 दिसंबर। पोलियो जैसी घातक बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लेते हुए सोनभद्र जिले के चोपन क्षेत्र में रविवार को पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ धूमधाम से हुआ। पोलियो दिवस के पावन अवसर पर समाजसेवी कृष्णकांत भारती और अनीस अहमद ने कंधे से कंधा मिलाकर पहले बच्चों को पोलियो की जीवनरक्षक खुराक पिलाई। यह नजारा देखकर पूरा समुदाय भावुक हो उठा, क्योंकि यह अभियान न केवल बच्चों की सेहत की ढाल है, बल्कि देश की पोलियो मुक्त उपलब्धि को अटल बनाए रखने का प्रतीक भी है।कार्यक्रम का आगाज होते ही चोपन के आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों पर चहल-पहल बढ़ गई। समाजसेवी कृष्णकांत भारती ने अभिभावकों से भावुक अपील की, “पोलियो जैसी खतरनाक बीमारी से अपने नन्हे-मुन्नों को बचाना हमारा कर्तव्य है। यह अभियान सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि निरंतर सतर्कता का प्रतीक है। हर माता-पिता को आगे आना होगा, ताकि हमारा जिला और देश हमेशा पोलियो मुक्त रहे।” वहीं, अनीस अहमद ने कहा, “भारत को 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन लापरवाही की एक छोटी सी भूल सब कुछ बर्बाद कर सकती है। आइए, हम सब मिलकर इस अभियान को सफल बनाएं।”अभियान की व्यापक तैयारी: 0-5 वर्ष के हर बच्चे को मिलेगी खुराकस्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस अभियान के लिए जबरदस्त तैयारी की है। चोपन ब्लॉक में कुल 0 से 5 वर्ष तक के लगभग 5 हजार बच्चों को लक्ष्य बनाया गया है। पहले दिन ही सैकड़ों बच्चों को खुराक पिलाई गई, जबकि बाकी दो दिनों में घर-घर जाकर शेष बच्चों तक यह सुरक्षा कवच पहुंचाया जाएगा। कार्यक्रम में ए.एन.एम. विद्यावती ने बताया, “हमारी टीम 24 घंटे अलर्ट पर है। अभियावकों को दोबारा खुराक न दिलाने पर जुर्माना भी हो सकता है। हर बच्चे की सेहत हमारी प्राथमिकता है।”आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अंजलि और सहायिका पूजा ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को समझाया कि पोलियो लकवा मार सकता है, जो जिंदगी भर के लिए अभिभावकों का दर्द बन जाता है। अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी मैदान में उतर आए—टीकाकरण दलों ने चोपन के दूरस्थ गांवों जैसे हरदुआ, बघौली और चिरैंया तक पहुंच बनाई। आंकड़ों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले साल पल्स पोलियो में 95 प्रतिशत से अधिक कवरेज हुआ था, और सोनभद्र जैसे जिलों ने इसमें अग्रणी भूमिका निभाई। इस बार भी लक्ष्य 100 प्रतिशत है!पोलियो का काला इतिहास और आज की चुनौतियांदेखा जाए तो पोलियो ने कभी भारत को कमजोर किया था। 1980 के दशक में लाखों बच्चे इसके शिकार हुए, लेकिन ओआरएस दवा और पल्स पोलियो जैसे अभियानों ने चमत्कार कर दिखाया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को पोलियो फ्री घोषित किया, लेकिन पड़ोसी देशों से खतरा अभी बरकरार है। चोपन जैसे ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती है। समाजसेवियों ने इसी कमी को पूरा करने के लिए अभियान को सामुदायिक स्तर पर ले जाने का फैसला किया। उन्होंने स्थानीय मस्जिदों, मंदिरों और पंचायत भवनों पर जागरूकता शिविर लगाने की योजना बनाई।संकल्प से गूंजा माहौल: सबका साथ, सबका विकासकार्यक्रम के अंत में उपस्थित सैकड़ों लोगों ने सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने हाथ उठाकर कहा, “हम अपने क्षेत्र में हर घर तक पोलियो खुराक पहुंचाएंगे और जागरूकता फैलाएंगे।” यह दृश्य देखकर लग रहा था मानो चोपन का हर कोना पोलियो मुक्त भारत के संकल्प से ओत-प्रोत हो गया। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की कि अभियान के दौरान कोई बच्चा वंचित न रहे—बुखार या अन्य कारणों से छूटे बच्चों के लिए विशेष दलों का गठन किया गया है।सोनभद्र के जिलाधिकारी और सीएमओ ने भी जिले भर के अभियान पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। चोपन के अलावा ओबरा, दुद्धी और रॉबर्टसगंज जैसे क्षेत्रों में भी यही जोश देखने को मिल रहा है। यदि यह अभियान सफल रहा, तो जिला एक बार फिर राज्य में टॉप पर होगा।अभिभावक सतर्क रहें—आज ही अपने बच्चे को पिलाएं पोलियो ड्रॉप। क्योंकि स्वस्थ बच्चे ही मजबूत भारत का आधार हैं!

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