तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र।जिले के छात्रों और किसानों से जुड़ी दो अहम व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख़्त समय-सीमा और निर्देश जारी किए हैं। एक ओर दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि तय कर दी गई है, वहीं दूसरी ओर रबी सीजन में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और दुरुपयोग रोकने के लिए जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है।
*छात्रवृत्ति में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त*
जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी नरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत इन्स्टीट्यूट स्तर से छात्राओं द्वारा रजिस्ट्रेशन एवं ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 20 दिसम्बर 2025 निर्धारित की गई है।छात्र-छात्राओं को आवेदन का फाइनल प्रिंट आउट 23 दिसम्बर 2025 तक निकालना अनिवार्य होगा, जबकि सभी वांछित संलग्नकों के साथ हार्ड कॉपी संबंधित शिक्षण संस्थान में 24 दिसम्बर 2025 तक जमा करनी होगी।सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शत-प्रतिशत पात्र छात्र-छात्राओं से आवेदन कराते हुए अपने स्तर से समस्त कार्यवाही 24 दिसम्बर 2025 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
*उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई*
इसी क्रम में जिलाधिकारी श्री बी.एन. सिंह ने रबी फसलों की बुवाई के मद्देनज़र उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि उर्वरक विक्री केन्द्रों पर किसानों की बढ़ती भीड़ और निर्धारित मात्रा से अधिक उर्वरक न मिलने की शिकायतें मिल रही हैं, जिसे गंभीरता से लिया गया है।जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन सचिवों के पास एक से अधिक सहकारी समितियों का प्रभार है, वे किस दिन किस विक्री केन्द्र पर उपलब्ध रहेंगे, इसकी सूचना स्पष्ट रूप से उर्वरक विक्री केन्द्रों के नोटिस बोर्ड पर अंकित कराएं और किसानों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित करें, ताकि किसी भी किसान को भटकना न पड़े।उन्होंने स्पष्ट किया कि एक किसान को उसकी कृषि भूमि के प्रति हेक्टेयर आधार पर अधिकतम डीएपी 5 बैग और यूरिया 7 बैग ही उपलब्ध कराया जाएगा। इससे अधिक मात्रा लेना या भंडारण करना उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 का उल्लंघन माना जाएगा, जिस पर कठोर वैधानिक कार्रवाई होगी।
उर्वरक वितरण के समय किसानों से खतौनी/जोत बही की छायाप्रति लेना अनिवार्य किया गया है और सभी विवरण उर्वरक विक्रय रजिस्टर में दर्ज करना होगा।असामाजिक तत्वों पर प्रशासन की पैनी नजर जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यूरिया डायवर्जन, कालाबाजारी, जमाखोरी या गैर-कृषि गतिविधियों में उर्वरक के दुरुपयोग की किसी भी कोशिश पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला कृषि अधिकारी एवं सहकारिता विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं।स्पष्ट संदेश — समय और नियम दोनों का पालन जरूरी प्रशासन ने साफ कर दिया है कि चाहे छात्रवृत्ति का मामला हो या किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने का, किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्र और किसान दोनों ही निर्धारित समय-सीमा व नियमों का पालन करें, यही प्रशासन की प्राथमिकता है।





