अरबों का खनन, बदले में आदिवासियों की मौत! सोनभद्र हादसे ने खोली सरकार की संवेदनहीनता

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तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र की धरती एक बार फिर खून से लाल हो गई। 15 नवंबर को एक खदान में हुए भीषण हादसे ने सात आदिवासी मजदूरों की जान ले ली, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी सरकार की संवेदना कहीं नजर नहीं आई। न मुआवजे की घोषणा, न पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछने कोई मंत्री पहुंचा।
इस दर्दनाक चुप्पी को तोड़ते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) का प्रतिनिधिमंडल सोनभद्र पहुंचा और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। प्रतिनिधिमंडल ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रत्येक परिवार को एक-एक लाख रुपये का चेक सौंपा। साथ ही सरकार से प्रत्येक मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
“यह सरकार सिर्फ अमीरों की है” – वीरेंद्र सिंह सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा—
“यह सरकार केवल बड़े लोगों और माफियाओं के लिए काम कर रही है। गरीब, आदिवासी और मजदूरों के लिए इसमें कोई जगह नहीं है। कल्याणकारी राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों से सरकार पूरी तरह मुंह मोड़ चुकी है।”
अवैध खनन का काला सच सपा प्रतिनिधिमंडल ने सोनभद्र में पोकलेन मशीनों और ब्लास्टिंग से हो रहे बेलगाम अवैध खनन पर गंभीर चिंता जताई। नेताओं ने कहा कि अवैध खदानों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं, जिससे दीवारें धंसती हैं और मजदूर जिंदा दफन हो जाते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियमों के तहत ब्लास्टिंग और भारी मशीनों से खनन पर रोक है, तो फिर यह सब खुलेआम कैसे चल रहा है?प्रदूषण ने छीनी सांस
सपा नेताओं ने खनन से फैल रहे भीषण प्रदूषण को भी बड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना था कि उड़ती धूल और जहरीली हवा ने आम लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल कर दिया है, लेकिन सरकार आंख मूंदे बैठी है।
‘आदिवासी गौरव’ और आदिवासियों की मौत
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए कहा—
“हादसे से महज 5 किलोमीटर दूर ‘आदिवासी गौरव’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, लेकिन जिन आदिवासियों की जान गई, उनके लिए न संवेदना जताई गई और न ही मुआवजे की घोषणा हुई।”
अरबों का राजस्व, बदले में मौत
सपा ने आरोप लगाया कि सोनभद्र प्रदेश को खनिज संपदा और बिजली उत्पादन से अरबों रुपये का राजस्व देता है, लेकिन बदले में यहां के आदिवासी गरीबी, बेरोजगारी और मौत झेलने को मजबूर हैं।अखिलेश यादव पहले ही कर चुके हैं मदद
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इससे पहले पीड़ित परिवार लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले थे। उस दौरान उन्होंने बच्चों को 30 हजार रुपये नकद सहायता दी थी और प्रत्येक परिवार को एक लाख रुपये देने की घोषणा की थी।
“सरकार बनेगी तो मिलेगा पूरा न्याय”
पीड़ित परिवारों की दयनीय हालत का जिक्र करते हुए सपा नेताओं ने कहा कि कई घरों में छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता हैं, जिनका अब कोई सहारा नहीं बचा।
अंत में सपा ने भरोसा दिलाया—
“जब हमारी सरकार बनेगी, तो पीड़ित परिवारों को पूरा न्याय मिलेगा। हर महिला को 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे सम्मान के साथ अपनी जिंदगी चला सकें।”

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