पवित्र घाट बना शर्मनाक कहानी का गवाह: नवजात लावारिस मिलने से सनसनी

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

जनपद सोनभद्र से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जिस पवित्र घाट पर रोज़ाना लोग आस्था के साथ सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर अपने परिवार की खुशहाली और संतानों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं, उसी स्थान पर एक नवजात शिशु के लावारिस हालत में मिलने की खबर ने माहौल को शोक और आक्रोश में बदल दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर भारी संख्या में स्थानीय लोग जुट गए। हर चेहरे पर हैरानी, हर आंख में सवाल और हर दिल में दर्द साफ देखा जा सकता था। लोग एक-दूसरे से यही पूछते नजर आए कि आखिर ऐसा कौन सा कारण रहा होगा, जिसने किसी को इस मासूम को इस हालत में छोड़ने पर मजबूर कर दिया। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
बताया जा रहा है कि आज भी समाज के कई हिस्सों में बेटियों को लेकर पुरानी सोच पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। “वंश चलाने” की संकीर्ण मानसिकता, पितृसत्तात्मक सोच और सामाजिक दबाव जैसे कारण आज भी कई परिवारों को अमानवीय फैसले लेने पर मजबूर कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा और आधुनिकता के तमाम दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर बदलाव अभी अधूरा है।इसके अलावा, आर्थिक तंगी, सामाजिक बदनामी का डर और पारिवारिक दबाव भी ऐसी घटनाओं की बड़ी वजह बनते हैं। कई बार लोग समाज के डर से ऐसे कठोर कदम उठा लेते हैं, जिनकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया है। संबंधित विभागों और पुलिस टीम द्वारा जांच शुरू कर दी गई है और आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें, ताकि समय रहते ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।यह घटना एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सच में आधुनिक समाज की ओर बढ़ रहे हैं, या अब भी पुरानी कुरीतियों के बोझ तले दबे हुए हैं। जरूरत है न सिर्फ कानून के सख्त पालन की, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाने की—ताकि कोई भी मासूम इस तरह बेबस और लावारिस न छोड़ा जाए।

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