तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र
जनपद में विश्व मलेरिया दिवस इस बार सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर बदलाव की ठोस रणनीति के साथ मनाया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष गोष्ठी में स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया उन्मूलन को लेकर बड़े कदमों का खाका पेश किया।
कार्यक्रम की थीम “अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा” को केंद्र में रखते हुए अधिकारियों ने साफ संदेश दिया कि मलेरिया के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक चरण में है। बैठक में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए, जहां मलेरिया की वर्तमान स्थिति, रोकथाम और उपचार को लेकर गहन मंथन हुआ।
जिला मलेरिया अधिकारी ने प्रस्तुति के जरिए बताया कि जनपद में मलेरिया के मामलों में लगातार कमी आ रही है, लेकिन अभी भी चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। खासकर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, झोलाछाप डॉक्टरों का प्रभाव और अंधविश्वास (जैसे जादू-टोना) इलाज में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
इस दौरान एक अहम सुझाव सामने आया, जब दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रमुख मुकेश श्रीवास्तव ने दुरूह इलाकों में मोबाइल मलेरिया क्लीनिक शुरू करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि जहां एम्बुलेंस तक पहुंचना मुश्किल है, वहां मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं ही लोगों तक इलाज पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले में हर बुखार के मरीज की मलेरिया जांच पूरी तरह निःशुल्क की जा रही है। साथ ही, आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर जांच करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे शुरुआती स्तर पर ही रोग की पहचान हो सके।
मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष ने मलेरिया के उपचार की आधुनिक विधियों पर प्रकाश डालते हुए समय पर जांच और दवा को जीवनरक्षक बताया। उन्होंने कहा कि सही समय पर इलाज मिलने से मलेरिया पूरी तरह ठीक हो सकता है।
बैठक के अंत में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (वीबीडी) ने सभी विभागों के समन्वय और जनभागीदारी को मलेरिया उन्मूलन की कुंजी बताया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कार्यक्रम प्रबंधक और अन्य कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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