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स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करके नए कनेक्शन पर कास्ट डाटा बुक के विपरीत वसूली पर कारपोरेशन को बड़ा झटका नियामक आयोग ने जारी किया आदेश कहां यूपीपीसीएल का आदेश आयोग आदेशों की खुली अवहेलना क्यों ना विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत की जाए करवाई।
उपभोक्ता परिषद की अवमानना याचिका पर विद्युत नियामक आयोग ने सख्त लहजे में पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक व अध्यक्ष को भेजा आदेश कहां 15 दिन में बताएं क्यों आयोग आदेश की की गई ऑवहेलना क्या था कारण अन्यथा की स्थिति में अवमानना की कार्यवाही होगी अब जहां पावर कारपोरेशन का फंसना तय।
उपभोक्ता परिषद में आयोग द्वारा जारी किए आदेश पर आयोग का जताया आभार बताया दीपावली पर उपभोक्ताओं के लिए तोहफा और कहां आगे उपभोक्ताओं के परिसर पर अनिवार्य रूप से जो स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया जा रहा है उसके खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी ।
अब जहां उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को कनेक्शन की दरों में 6 गुना तक वृद्धि के आदेश को लेना पड़ेगा वापस वही राष्ट्रीय कानून विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत कार्यवाही के लिए भी रहना पड़ेगा तैयार उपभोक्ता परिषद ने कहा था कानून से बढ़कर कोई नहीं सिद्ध कर दिया।
उपभोक्ता परिषद ने कहा 9 सितंबर को जारी हुआ आदेश 10 सितंबर से लेकर 18 अक्टूबर तक झटपट पोर्टल पर कुल 69219 बिजली कनेक्शन किए गए जारी यदि सबसे वसूला गया रुपया 6016 तो लगभग 41 करोड़ की हुई वसूली ऐसे में गलत वसूली को उपभोक्ताओं को करना पड़ेगा वापस
उपभोक्ता परिषद की अब दूसरी लड़ाई विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को पोस्टपेड और प्रीपेड का दिया जाए विकल्प अनिवार्य रूप से सभी उपभोक्ताओं के परिसर पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर की स्थापना गलत उपभोक्ताओं से लिया जाए उनका विकल्प।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पावर कॉरपोरेशन द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से बिना नियामक आयोग के अनुमति के 6 सितंबर से पूरे प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करके रुपया 1032 वाला बिजली कनेक्शन लगभग 6100 से 6400 तक महंगा करने के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की तरफ से विद्युत नियामक आयोग में आयोग आदेशों की अवहेलना के लिए विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत अवमानना वाद दायर किया गया था अंततः विद्युत नियामक आयोग ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक को यह सख्त निर्देश जारी किया है की पावर कॉरपोरेशन द्वारा नए कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करके नॉन-स्मार्ट प्रीपेड मीटर (आई0 एस0:15884) की कीमत को आधार बनाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर (आई0 एस016444) की कीमत स्वता तय कर दी, जिससे उपभोक्ताओं से ₹6016 की अनधिकृत वसूली की जा रही है यह उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी किए गए कॉस्ट डाटा बुक का बड़ा उल्लंघन है क्यों ना विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत आयोग इस अवहेलना के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दें विद्युत नियामक आयोग द्वारा पावर कॉरपोरेशन से 15 दिन में जवाब मांगा गया है प्रबंध निदेशक को जारी किए गए आदेश की प्रति अध्यक्ष उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को भी भेजी गई है गौर तलब है कि पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक द्वारा जारी किए गए 9 सितंबर के आदेश को बाद में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष द्वारा भी सभी बिजली कंपनियों को भेजा गया था। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत यदि अपराध सिद्ध होता है तो अधिकतम रुपया 1 लाख तक लग सकती है पेनल्टी।
उत्तर प्रदेश राज विद्युत उपभोक्ता परिषद में विद्युत नियामक आयोग द्वारा सुनाए गए फैसले को दीपावली पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए बड़ा तोहफा करार दिया और कहा विद्युत नियामक आयोग ने एक बार फिर संवैधानिक संस्था होने के नाते प्रदेश के उपभोक्ताओं के संरक्षक की भूमिका निभाई है जिससे प्रदेश के 3 करोड़ 62 लाख विद्युत उपभोक्ताओं में खुशी की लहर है। अब उपभोक्ता परिषद की आगे लड़ाई जारी रहेगी कि विद्युत उपभोक्ताओं के परिसर पर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5 )के तहत उसे विकल्प दिया जाए और अधिनियम के तहत पोस्टपेड व प्रीपेड लेने का उसका अधिकार सुरक्षित है उसे भी लागू कराया जाए।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा अंतत उपभोक्ता परिषद की लड़ाई रंग लाई और यात्रा हो गया कि विद्युत नियामक आयोग आदेशों की अवहेलना करके पावर कॉरपोरेशन द्वारा पूरे उत्तर प्रदेश की जनता को दीपावली जैसे प्रकाश पर्व के त्योहार पर लाल तेनु में ले जाने की साजिश की गई अब जहां पावर कारपोरेशन को गलत आदेश को वापस लेना पड़ेगा वहीं उसे अधिक वसूल की गई धनराज को भी उपभोक्ताओं को लौटाना पड़ेगा और सबसे बड़ा मामला यह है कि अब विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत पावर कॉरपोरेशन कार्यवाही से नहीं बच सकता क्योंकि कॉरपोरेशन ने आयोग आदेशों की अवहेलना की है सबसे बड़ा सवाल या उठना है कि पावर कारपोरेशन ने जो काम विद्युत नियामक आयोग का है उसे अपने हाथ में लेने की कोशिश क्यों की गई आने वाले समय में कोई और भी ऐसा आदेश यदि पावर कॉरपोरेशन कर देता है जिससे प्रदेश की जनता आंदोलन हो जाती है उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी या कहीं ना कहीं सरकार की छाप धूमिल करने वाला फैसला था।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कारपोरेशन ने अनिवार्य रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का आदेश 10 सितंबर को जारी किया उपभोक्ता परिषद ने जब 11 सितंबर से 18 अक्टूबर तक का झटपट पोर्टल का पूरा डाटा का परीक्षण किया तो सामने आया की टोटल 228839 उपभोक्ताओं ने कनेक्शन के लिए आवेदन डाला जिसमें से 69219 उपभोक्ताओं का कनेक्शन जारी किया गया यदि हम मान लिया जाए कि सभी विद्युत उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कास्ट रुपया 6016 वसूला गया तो कल लगभग 41 करोड़ का राजस्व कमाया गया इसमें जो भी गलत तरीके से वसूली की गई है वह प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली कंपनियों को वापस करना पड़ेगा।





