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जो लोग अखिलेश सिंह के बारे में जानना चाह रहे उनके लिए ये 1 साल पुरानी पोस्ट
डॉन अखिलेश की कहानी
अखिलेश सिंह का परिवार मूलतः बक्सर बिहार का है लेकिन पिता बिहार पुलिस में थे और जमशेदपुर में पोस्टेड थे ,जो कि झारखण्ड अलग राज्य बनने के बाद वही के निवासी हो गए | अखिलेश सिंह के पिता झारखण्ड पुलिस मेश एसोशिएशन के अध्यक्ष भी रहे थे |
अखिलेश सिंह शुरू में छात्र राजनितिं से जुड़ा लेकिन वो जल्द ही राजनितिं छोड़कर ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में आ गया और यही से उसने अपराध की दुनिया मे कदम रखा |
शुरू में उसके मार पीट के मामले आये लेकिन पिता के पुलिस की राजनितिं में होने और सजातीय अधिकारियों में पकड़ होने के कारण वह बार बार बच जाता था |
लेकिन 2001 में उसने बड़ा कांड कर दिया जिसके बाद उसके लिए अपराध की दुनिया मे उसका नाम तेजी से बढ़ने लगा|
उसने जमशेदपुर शहर के नामी बिजनेसमैन ओम प्रकाश काबरा को किडनैप कर लिया और करोड़ की रंगदारी मांग ली |
इसी केस में उसे जेल भेज दिया गया ,एक दिन जेल में ही उसकी जेलर उमाशंकर पांडेय से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई ओर वही पर उसने जेलर को जान से मारने की धमकी दे डाली ,लोगो ने इसे ऐसे ही गुस्से में दी हुई धमकी समझा लेकिन ऐसा हुआ नही
जेल से छूटने के बाद 12 मार्च 2002 को उसने जेलर उमाशंकर पांडेय की बेरहमी से हत्या कर दी ,कहा जाता है की हत्या ड्रिल मशीन से की गई थी |
इसी साल 8 महीने बाद 6 nov 2002 को किडनैपिंग का केस करने के कारण बिजनेसमैन ओम प्रकाश काबरा की भी हत्या कर दिया |
इन दो हत्याओ के बाद अखिलेश सिंह का नाम अपराध की दुनिया में तेजी से बढ़ने लगा और उसे फिर एक नया नाम मिला ” सिंह जी ” | अखिलेश सिंह को सिंह जी के नाम से जाना जाने लगा और वो जल्द ही ट्रांसपोर्ट बिजनेस से बढ़कर स्क्रैप के बिजनेस में उतर गया ओर रंगदारी भी वसूलने लगा |
2007 में अखिलेश सिंह ने श्रीलेदर्स शूज कम्पनी के मालिक आशीष डे से रंगदारी मांगी लेकिन उन्होंने इसे इग्नोर कर दिया, इसके बदले में अखिलेश सिंह ने 2 नवम्बर 2007 को उसकी दिनदहाड़े हत्या करा दी
अब इस हत्याकांड के बाद जमशेदपुर के साथ झारखण्ड में भी अखिलेश सिंह का नाम तेजी से चमका, इसी बीच जमशेदपुर में अखिलेश सिंह की गैंग को ददई दुबे और निजाम के गैंग से चेलेंज मिल रहा था और अंत मे इन दोनों की भी हत्या अखिलेश सिंह के गैंग ने कर दी |
2008 का साल ऐसा था जैसे अखिलेश सिंह ने कसम खा ली हो अपने विरोधियों को समाप्त करने और अपना वर्चस्व कायम करने की
इस साल उसने जमशेदपुर के मशहूर ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या कर दी जिससे कि पूरा जमशेदपुर दहल गया और अखिलेश सिंह यही नही रुका उसने 4 oct 2008 को टाटा स्टील के अधिकारी जयराम सिंह की हत्या करवा दी |
उसने 15 मार्च 2008 को रवि चौरसिया ,16 मई को श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे के घर पर फायरिंग ,25 जुलाई कांग्रेसी नेता नट्टू झा पर फायरिंग, 17 अगस्त सतेंद्र सिंह के ससुराल पर फायरिंग,28 अगस्त ठेकेदार रंजीत सिंह पर फायरिंग,17 sep को जेल से पेशी आने पर अपराधी परमजीत सिंह पर फायरिंग करके सनसनी मचा दी
लोग हैरान तो तब हो गए जब 20 अप्रैल 2008 को उसने पूर्व जज आरपी रवि के आवास पर ही फायर करवा दिया |
इसके बाद अखिलेश सिंह फरार रहने लगा और उसने भारत के अधिकतर राज्यो और विदेशों में जमकर सम्पत्ति खड़ी करता रहा, उसने वसूली और स्क्रैप के पैसों से यूपी बिहार झारखण्ड मप्र राजस्थान हरियाणा दिल्ली उत्तराखण्ड ,प बंगाल ,सिंगापुर हर जगह रियल स्टेट में पैसे लगाए
वो मप्र में संजय सिंह, दिल्ली में अरविंद शर्मा, हरियाणा में दिलीप सिंह, उत्तराखण्ड में अजीत सिंह, उप्र में मनोज सिंह के नाम से बिजनेस करता रहा
तब तक उसके ऊपर पुलिस ने 7 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था |
2016 में अखिलेश सिंह ने अपने सबसे बडे विरोधी उपेंद्र सिंह की हत्या जमशेदपुर कोर्ट परिसर में ही करवा दी ,इस हत्याकांड में उसके दो शूटर सोनू सिंह विनोद सिंह दोनो को पुलिस ने वही पकड़ लिया था |
7 लाख का इनामी और पांच राज्य में वांटेड होने के बाद पुलिस उसके खोज में तेजी से जुट गई और उसे गुड़गांव क्राइम ब्रांच की मदद से जमशेदपुर पुलिस ने गुड़गांव के एक फ्लैट से पत्नी के साथ गिरफ्तार किया| पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार करना चाहा तो उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी और बदले में पुलिस ने भी फायर कर दिया जिसमें गोली उसके पैर में लगी
खैर एक थ्योरी ये भी है कि ये गिरफ्तारी प्री प्लांड थी और झारखण्ड के एक लोकल नेता और एक केंद्र के एक बडे नेता के मदद से जानबूझकर गिरफ्तारी करवाई गई क्योंकि दिन प्रतिदिन अखिलेश सिंह की मुश्किलें बढ़ती जा रही थी |
ED ने 2018 में अखिलेश सिंह की 700 करोड़ की सम्पत्ति जब्त की गई थी जिसमे
कोलकाता के कलिकापुर ICICI बैंक से 12 करोड़, नोएडा के एक्सिस बैंक में 22 करोड़, दिल्ली रोहिणी बैंक में 34 करोड़ जमा रुपये जब्त किए
जबकि जबलपुर शहर में 200 एकड़ जमीन, गुजरात सूरत में 15 एकड़ जमीन, नोएडा में 2 फ्लैट, गुरुग्राम में 2 फ्लैट,
गुरुग्राम, जयपुर ,बनारस में रियल स्टेट में लगे पैसे|
रानीगंज कोल माइंस में 15 हजार टन DO
सिंगापुर में एक्सपोर्ट आयरन कम्पनी
ED ने अब ये सम्पत्ति कोर्ट के आदेश के बाद अखिलेश सिंह को वापस कर दी है
अधिकतर केसों में सुनवाई हो चुकी है और अखिलेश सिंह अधिकतर केसों में बरी हो चुके है लेकिन जिस हिसाब का उनका क्राइम रिकार्ड है न्यायालय उन्हें बाहर आने देगा इसकी उम्मीद कम है
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