तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – विजय सोनी
बीजपुर(सोनभद्र)म्योरपुर शिक्षा क्षेत्र के जारहा न्याय पंचायत में संचालित रसूखदारों के अवैध विद्यालयों पर कानूनी करवाई से शिक्षा महकमा बच रहा है।दर्जन भर गाँवो में डेढ़ दर्जन से अधिक संचालित बगैर मान्यता के इण्टर कालेज हाईस्कूल जूनियर तक संचालित विद्यालयों को महज विभागीय नोटिश तामिला के बाद करवाई धीरे धीरे ठंडे बस्ते में धूल फांकने लगी है हलाकि अधिकारियों की बातों पर गौर करें तो करवाई होनी है पर थोड़ा वक्त लगेगा।बताया जाता है कि क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में गिनती के कुछ विद्यालय छोड़ कर अधिकांश विद्यालय धड़ल्ले से मान्यता बिहीन संचालित हैं।सूत्रों पर भरोसा करें तो ऐसे भी विद्यालय है जिनके पास मान्यता के नाम पर कुछ कागजात केवल कक्षा पांच और आठ तक तो कुछ के पास वह भी नही है।लेकिन शिक्षण कार्य के नाम पर बड़े बड़े प्रलोभन लिखे डिजिटल बोर्ड लगा कर इण्टर तक के विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।मजेदार बात तो यह है कि क्षेत्र के तमाम बेरोजगार अप्रशिक्षित नवयुवक युवतियों को इन बच्चों का भविष्य संवारने का जिम्मा पाँच हजार से छह हजार रुपये महीना के वेतन पर इन्ही के कंधों पर दिया गया है जो खुद जिस विषय को पढ़ाते हैं उन्हें खुद भी उसका मायने तक नही पता है।महज लूटखसोट और शोषण के नाम पर आदिवासी क्षेत्र के बच्चों अभिभावकों का शोषण कर रहे बिद्यालय प्रबन्धन को हर वर्ष नोटिश भेजने का कोरम किया जाता है लेकिन किसी कारण बस होता कुछ नही है।उसके पीछे कारण बताया जाता है कि वक्त वक्त पर शासन और सत्ता का दामन थामने वाले सफेद पोश संचालक संरक्षण देने वालों के साथ अपना पाला भी बदल देते हैं यही कारण है कि सरकार किसी की भी हो पर कारवाई की बजाय प्रत्येक वर्ष बिद्यालय का सत्र समाप्त होते ही पुरानी नोटिश बता कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।सूत्रों पर विश्वास करें तो लम्बे वर्षो से चेतवा में संचालित एक इण्टर कालेज रजमिलान गाँव मे संचालित एक बिद्यालय के मान्यता पर संचालित है नियम विरुद्ध बनाए गए कुछ कमरे के बावजूद वहाँ पर परीक्षा सेंटर तक आयोजित होता है इससे जाहिर है कि इतने बड़े रैकेट के पीछे महकमा भी कही हमाम में नंगा हैं।
About the Author
Tez Express News
Administrator
555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555





