तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिला दौरे के ठीक बाद ओबरा–बिल्ली खनन क्षेत्र की कृष्णा माइनिंग खदान में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया। भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती के अवसर पर जिले भर में खनन कार्य बंद था, लेकिन इसके बावजूद इस खदान में गुपचुप तरीके से अवैध खनन चलता पाया गया। प्रशासनिक लापरवाही और खदान संचालकों की मनमानी एक बार फिर मजदूरों की जान पर भारी पड़ गई।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के समय खदान में लगभग 500 फीट ऊंचाई पर कंप्रेसर से ड्रिलिंग हो रही थी। मौके पर करीब 9 कंप्रेसर एक साथ चल रहे थे। ड्रिलिंग की तेज आवाज़ और कंपन के बीच अचानक ऊपर से भारी चट्टान खिसक कर नीचे गिर गई, जिससे वहां काम कर रहे कई मजदूर मलबे में दब गए। इस हादसे में मौके पर ही दो मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।राहत-बचाव कार्य जारीघटना की खबर लगते ही आसपास के मजदूरों और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। राहत-बचाव अभियान में अल्ट्राटेक कंपनी, दुसान कंपनी और ओबरा पावर कॉरपोरेशन की भारी मशीनों को लगाया गया है। पोकलेन मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम जारी है। वहीं एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को भी अलर्ट किया गया है। घटनास्थल पर गहरी खामोशी और भय का माहौल है। कितने मजदूर अभी मलबे में फंसे हैं, इसका पता नहीं चल सका है।परिजनों का रो-रोकर बुरा हालहादसे की खबर मिलते ही मृतकों और लापता मजदूरों के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए। रोते-बिलखते परिजनों को संभालना मुश्किल हो रहा है। उनके आंसुओं और चीखों से पूरा इलाका गूंज उठा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी खदान में वर्ष 2012 में भी ऐसा बड़ा हादसा हुआ था, लेकिन सुरक्षा इंतजामों में कभी सुधार नहीं किया गया।प्रशासन सवालों के घेरे मेंसबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब पूरे जिले में खनन कार्य बंद था, तो फिर कृष्णा माइंस में खनन कैसे जारी था? क्या यह प्रशासन और खदान संचालकों की मिलीभगत का परिणाम है? स्थानीय लोग इसे खुला भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बता रहे हैं।घटना पर जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने दुख जताते हुए कहा, “हादसा अत्यंत दुखद है। रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चल रहा है। अंदर कितने लोग फंसे हैं, इसकी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। मुख्यमंत्री के दौरे पर खनन बंद करने का कोई अलग आदेश नहीं था। मामले की जांच की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।”जांच और कार्रवाई की मांग तेजहादसे के बाद खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने की मांग जोर पकड़ रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खदान संचालकों पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए, मौके पर मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच हो, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और जिले में अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।फिलहाल मौके पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और जिले के सभी सक्रिय खनन स्थलों की जांच का आदेश जारी किया गया है। रेस्क्यू टीमों का अभियान रातभर जारी है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि किसी भी कीमत पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।






