बिल्ली-मारकुंडी हादसे पर रेस्क्यू ऑपरेशन हुआ खत्म, सात मजदूरों के शव बरामद खदान मालिक सहित सहयोगियों पर मुकदमा दर्ज

तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र ओबरा जिले के बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र स्थित कृष्णा माइनिंग वर्क्स में शनिवार को हुए दर्दनाक खदान हादसे के बाद तीन दिनों तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन आखिरकार मंगलवार दोपहर पूरी तरह समाप्त घोषित कर दिया गया। जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने घटनास्थल पर संयुक्त रूप से रेस्क्यू बंद करने की घोषणा की।पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ और एसडी आरएफ की टीमें शनिवार शाम से लगातार मलबे में फंसे मजदूरों की तलाश में जुटी थीं। गहरे मलबे और विशाल चट्टानों के बीच चुनौती पूर्ण परिस्थितियों में काम कर रही रेस्क्यू टीमों ने सफलता पूर्वक सात शवों को मलबे से बाहर निकाला। सभी मृतकों की पहचान कर परिजनों को सौंप दिया गया है अधिकांश शवों का अंतिम संस्कार सोमवार देर शाम प्रशासन की निगरानी में किया गया,जबकि एक शव क्षत-विक्षत होने के कारण पहचान प्रक्रिया में विलंब हुआ।रेस्क्यू में विलंब की वजह बनी चट्टान जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह के अनुसार, रेस्क्यू कार्य में देरी की बड़ी वजह मलबे के नीचे मौजूद एक विशाल चट्टान रही, जिसे हटाने में काफी समय लगा। मौके पर डॉग स्क्वाड टीम ने भी बारीकी से निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया कि मलबे में अब कोई शव शेष नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रेस्क्यू अभियान अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।मुकदमा दर्ज, विवेचना शुरूओबरा थाना पुलिस ने मृतक मजदूरों के परिजनों की तहरीर पर खदान मालिक और उनके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस प्रकरण की विवेचना ओबरा क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में की जा रही है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने बताया कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।मजदूरों की सुरक्षा पर फिर खड़े हुए सवाल
बिल्ली-मारकुंडी क्षेत्र का यह हादसा एक बार फिर खदानों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर गया है। वर्ष 2012 में भी इसी क्षेत्र में ऐसा ही हादसा हुआ था जिसमें कई मजदूरों की जान चली गई थी, बावजूद इसके खदानों में सुरक्षा उपायों की अनदेखी का दौर जारी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मजदूर सस्ते में मिल जाते हैं, जिसका फायदा खदान संचालक उठाते हैं। मजदूरों की सुरक्षा को लेकर न तो कंपनियां गंभीर दिखती हैं और न ही खनन विभाग या जिला प्रशासन।प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खनन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और नियमित निरीक्षण की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार घट रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खदान संचालन में निर्धारित सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन किया जाता और समय-समय पर तकनीकी जांच होती, तो ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकती थीं।इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ सात परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि इसने सोनभद्र की खनन नीतियों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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