तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
कोन (सोनभद्र)। बाल अधिकार सप्ताह के अवसर पर उत्तर प्रदेश कॉरपोरेशन फॉर एम्पावर गर्ल्स (UPCEG) एवं साथिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “सशक्त नारी – सशक्त समाज” अभियान के अंतर्गत कृषक समाज इंटर कॉलेज में दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 19 और 20 नवंबर को आयोजित हुआ, जिसमें लगभग 150 बच्चों, पाँच शिक्षकों तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं अन्य स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल युग में सजगता के प्रति जागरूक करना था। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि बाल अधिकार केवल कानूनी परिभाषा नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी हैं। बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना, समान अवसर प्रदान करना और उनके सर्वांगीण विकास के लिए प्रेरित करना हम सबका कर्तव्य है। वक्ताओं ने कहा कि बच्चे समाज के भविष्य निर्माता हैं, इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा करना राष्ट्र निर्माण का आधार है।डिजिटल साथी फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष वेद ओझा ने अपने संबोधन में कहा कि आज के बच्चे समझदार हैं, उन्हें बस सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। जरूरत है कि बच्चों को अधिकारों की जानकारी के साथ कर्तव्यों का भी बोध कराया जाए। उन्होंने आत्मरक्षा, लैंगिक समानता, मानसिक स्वास्थ्य, नेतृत्व क्षमता और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे विषयों पर बच्चों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि जब बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है, तब उसके आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिससे वह अपनी बातें निडर होकर व्यक्त कर पाता है।कार्यक्रम के दौरान संस्थाओं से जुड़ी कार्यकर्ता काजल ने बच्चियों के बीच जाकर उनके प्रश्नों का उत्तर दिया और उन्हें खुलकर अपने विचार प्रकट करने के लिए प्रोत्साहित किया।विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री संदीप चौबे ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल बच्चों में जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि यह उनकी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के प्रति समाज को जिम्मेदार बनाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें सशक्त बनाना हर नागरिक का नैतिक दायित्व है।बच्चों की प्रतिक्रियाएँकार्यक्रम में शामिल छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए।कक्षा 8 की छात्रा अंचल ने कहा कि “ऐसी कार्यशालाएँ हमें पुरानी रूढ़ियों और भेद भावपूर्ण परंपराओं के खिलाफ आवाज उठाने की शक्ति देती हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देती हैं।”छात्रा सृष्टि ने कहा, “शादी की कानूनी उम्र 18 वर्ष है, लेकिन बच्चों के अधिकारों की जानकारी न होने से कभी-कभी हम स्वयं या दूसरों के भविष्य को खतरे में डाल देते हैं।”वहीं, छात्रा नेहा ने कहा, “लड़कियाँ और लड़के दोनों समान हैं और उनके अधिकार भी समान हैं। यह बात हर व्यक्ति को समझनी चाहिए।”छह माह तक चलेगा राज्य व्यापी अभियान यह कार्यक्रम UPCEG के छह माह लंबे राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 20,500 से अधिक किशोरियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करना है। इसी अभियान के तहत अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर भी विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। यह पहल मार्च 2026 तक, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस तक, जारी रहेगी।मिलान बी द चेंज संस्था पिछले 18 वर्षों से वंचित समुदायों की किशोरियों के सशक्ति करण, शिक्षा, नेतृत्व और कौशल विकास पर कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य स्थायी सामाजिक बदलाव लाना है ताकि किशोरियाँ सुरक्षित और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें।कार्यक्रम के अंत में आयोजकगणों ने कहा कि आने वाले समय में भी बच्चों के अधिकार, सुरक्षा और जागरूकता पर आधारित ऐसे शिक्षाप्रद कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि हर बच्चा सुरक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर नागरिक बन सके।





