तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
डाला, सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में हुए हादसे के बाद डीजीएमएस द्वारा 37 खदानों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध से डाला क्षेत्र में हाहाकार मच गया है। डाला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष मुकेश जैन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि दल ने खनन निदेशक को ज्ञापन सौंपकर बंद खदानों को सुरक्षित ढंग से चालू कराने की मांग की है। प्रतिनिधि मंडल में संतोष शर्मा, रामू सिंह गोड, सुधिर सिंह और संजय मित्तल शामिल थे।ज्ञापन की फोटोकॉपी देते हुए मुकेश जैन ने बताया कि बिना किसी ठोस जांच-पड़ताल के लगाए गए इस प्रतिबंध से खनन कार्य से सीधे जुड़े 10 हजार मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं। इन मजदूरों पर आश्रित करीब 30 हजार परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। जाड़े, गर्मी और बरसात के मौसम में भी कड़ी मेहनत कर परिवार पालने वाले ये दैनिक मजदूर अब भुखमरी के कगार पर हैं।उद्योग पर पड़ा गहरा असर, सैकड़ों मशीनें खड़ींखदानों में पत्थर ढोने का काम करने वाली 2 हजार से अधिक टिपर, 500 कम्प्रेसर मशीनें और सैकड़ों पोकलेन मशीनें पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। डाला स्टोन के नाम से दुनिया भर में मशहूर गिट्टी का उत्पादन बंद होने से 250 क्रशर प्लांट प्रभावित हो गए हैं। खनन उद्योग पर निर्भर डाला, ओबरा और चोपन क्षेत्र की चाय-पान, ठेला-खुमचा, पंचर, सैलून आदि छोटी दुकानों पर भी सन्नाटा पसर गया है।मुकेश जैन ने कहा, “खनन बंदी से बेरोजगार मजदूरों और उनके परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो रही है। अगर हालात यही रहे तो मजदूरों को मजबूरी में अन्य प्रदेशों की ओर पलायन करना पड़ेगा।” उन्होंने अपील की कि उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य में हर माह 13 करोड़ राजस्व देने वाले इस पांच दशक पुराने खनन उद्योग को तत्काल चालू किया जाए। इससे न केवल मजदूरों का जीवन सुखमय होगा, बल्कि गिट्टी उद्योग भी पटरी पर लौटेगा।प्रशासन से मांग की गई है कि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कर खदानों को चालू करने की प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि जनपद में खुशहाली बहाल हो सके।






