तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। ओबरा स्थित तापी विद्युत परियोजना के VIP गेस्ट हाउस और VIP कॉलोनी क्षेत्र में फैला कचरा, खुले में पड़ी शराब की खाली बोतलें और डस्टबिनों के आसपास बिखरी गंदगी ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। यहां मुख्यमहाप्रबंधक से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों का आवास है और महत्वपूर्ण अतिथियों का आगमन होता रहता है, लेकिन मौजूदा तस्वीरें स्वच्छता के दावों पर करारा प्रहार कर रही हैं। हर साल टेंडर प्रक्रिया से मोटी रकम आवंटित होने के बावजूद जमीनी हकीकत विपरीत बयां कर रही है।परियोजना परिसर में घूमने पर साफ दिखता है कि गीला-सूखा कचरा अलग करने के सरकारी निर्देश केवल कागजों तक सीमित हैं। VIP गेस्ट हाउस के आसपास प्लास्टिक के थैलें, खाने-पीने का कचरा और शराब की बोतलें बेखौफ पड़ी हैं। डस्टबिन तो लगे हैं, लेकिन उनके चारों ओर हर तरह का कचरा एकत्र हो चुका है। पर्यावरण नियमों का यहां खुला उल्लंघन हो रहा है, जो न केवल प्रदूषण फैला रहा है, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का भी संकेत दे रहा है।अधिकारियों की निगाह में अव्यवस्था का राजयह स्थिति सबसे ज्यादा विडंबनापूर्ण इसलिए है क्योंकि यह VIP क्षेत्र में हो रही है, जहां अधिकारियों की सीधी नजर रहती है। सवाल उठता है कि क्या व्यवस्था अनदेखी कर रही है या फिर इस अव्यवस्था से उसका कोई लेना-देना ही नहीं? स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर VIP गेस्ट हाउस जैसे संवेदनशील इलाके में यह हाल है, तो आम क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।हाल ही में परियोजना के गांधी मैदान प्रांगण में नशे की गतिविधियों और बदहाली को लेकर खबरें आई थीं। उन मुद्दों पर चर्चा के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठा। अब VIP कॉलोनी की यह तस्वीर बता रही है कि समस्या अब पूरे परियोजना क्षेत्र में फैल चुकी है। पर्यावरणीय नजरिए से यह लापरवाही और भी गंभीर है खुले कचरे से मच्छर-मक्खियां पनप रही हैं, जो बीमारियों को न्योता दे रही हैं। साथ ही, नशे से जुड़े अपशिष्ट सामाजिक माहौल को खराब कर रहे हैं।टेंडर पर सवाल, धन का हिसाब कौन लेगा?परियोजना प्रशासन हर साल स्वच्छता के लिए टेंडर जारी करता है और लाखों रुपये आवंटित होते हैं। कागजों में रिपोर्टें चमकदार हैं फाइलों और बैठकों में स्वच्छता अभियान के दावे गूंजते हैं। लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। स्रोतों के अनुसार, पिछले एक साल में स्वच्छता ठेके पर करीब 20 लाख रुपये खर्च होने का रिकॉर्ड है, फिर भी हालात सुधरे नहीं। क्या यह धन सही जगह जा रहा है? यह सवाल अब मुखर हो चुका है।सोन चेतना सामाजिक संगठन के अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद ने कहा, “यह किसी व्यक्ति पर आरोप का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल है। VIP गेस्ट हाउस में अगर शराब की बोतलें और कचरा सामान्य हो गया है, तो आम नागरिकों के इलाकों का क्या हाल होगा? हम प्रशासन से मांग करते हैं कि स्वच्छता ठेकेदारों का ऑडिट कराया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।” संगठन ने जिलाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ज्ञापन देने की योजना बनाई है।आगे क्या? कार्रवाई की मांग तेजपरियोजना प्रबंधन ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन स्थानीय पत्रकारों और निवासियों का कहना है कि बिना उच्च स्तरीय जांच के हालात नहीं सुधरेंगे। सरकार की स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद ऐसी लापरवाही निंदनीय है। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त मॉनिटरिंग और CCTV लगाने से स्थिति में सुधार हो सकता है। फिलहाल, यह खबर परियोजना प्रशासन के लिए आगाज की घंटी है—क्या वे जगीं या फिर अव्यवस्था यूं ही जारी रहेगी?






