सोनभद्र में हरियाली के नाम पर हराभरा घोटाला रेणुका नदी किनारे पौधों की जगह कागजों में उगा जंगल

IMG-20260428-WA0001

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

ओबरा/सोनभद्र।
प्रदेश सरकार भले ही करोड़ों पौधे रोपकर उत्तर प्रदेश को हरा-भरा बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कई जगह इन दावों की पोल खोल रही है। ताज़ा मामला सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र का है, जहां रेणुका नदी के तट पर स्थित पारसोई-4 वृक्षारोपण स्थल पर भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं।
कागजों में ‘हरियाली’, जमीन पर सूना सच
विभागीय बोर्ड पर 6112 ‘बोना नाली’ बनाए जाने का दावा किया गया है, लेकिन मौके पर ज्यादातर गड्ढे खाली पड़े हैं। जहां पौधे लगाए भी गए हैं, वहां भी मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है।
नियमानुसार पौधों के बीच लगभग 5 मीटर की दूरी होनी चाहिए, लेकिन यहां 1 मीटर के छोटे से दायरे में 25 से 30 पौधे ठूंस दिए गए हैं।
पौधारोपण नहीं, ‘पौधों की बलि’
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह एक ही स्थान पर इतने पौधे लगाने से उनका विकास संभव नहीं होता। बिना पर्याप्त जगह, खाद और सिंचाई के ये पौधे कुछ ही समय में सूख जाएंगे।
यानी हरियाली बढ़ाने के नाम पर पौधों को ‘जिंदा दफन’ किया जा रहा है।
मजदूरी बचाने का खेल?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे 15.28 हेक्टेयर क्षेत्र में गड्ढे खोदने और नालियां बनाने के बजाय विभाग ने एक ही जगह पौधे लगाकर लक्ष्य पूरा दिखा दिया।
इससे मजदूरी और अन्य खर्चों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
सुरक्षा खाई गायब, पशुओं का हमला जारी
नदी किनारे मिट्टी कटाव रोकने के लिए 1600 मीटर लंबी सुरक्षा खाई (CPT) बनाने का दावा भी सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आता है।
मौके पर सुरक्षा के अभाव में आवारा पशु पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।न सिंचाई, न संरक्षण
करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट में न तो सिंचाई की कोई व्यवस्था दिखती है और न ही पौधों की देखभाल के लिए खाद या कीटनाशकों का इस्तेमाल।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये पौधे बचेंगे कैसे?

About the Author

Tez Express News

Administrator

555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555

Leave a Reply