तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
ओबरा, सोनभद्र
ओबरा नगर में कबाड़ चोरी अब आम वारदात नहीं रही, बल्कि खुलेआम ‘डकैती स्टाइल’ में अंजाम दी जा रही है। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे, व्यस्त वीआईपी रोड पर स्थित सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल के सामने बंद पड़े संयुक्त प्रेस कार्यालय पर कबाड़ चोरों ने फिल्मी अंदाज़ में धावा बोल दिया।
ठेला लेकर पहुंचे चोरों ने बेखौफ अंदाज़ में टिन शेड को तोड़कर गिरा दिया और उसे ले जाने की कोशिश करने लगे। अचानक शेड गिरने की तेज़ आवाज़ से आसपास अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और दुकानदारों की सक्रियता बढ़ते ही चोर मौके से फरार हो गए।
दूसरी बार बना निशाना, पहले भी हो चुकी बड़ी चोरी
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी प्रेस कार्यालय का ताला तोड़कर चोर कुर्सी, मेज, कम्प्यूटर, सीपीयू, सीलिंग फैन, इन्वर्टर, बैटरी और जरूरी दस्तावेज तक उड़ा ले गए थे। उस समय भी डायल 112 और थाना पुलिस को सूचना दी गई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में चोरों के हौसले और बुलंद हो गए भीड़ ने बताया ‘कबाड़ रूट’, पुलिस को खुली चुनौती
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने पुलिस को साफ बताया कि धोबिया नाला के सामने वाली गली से रोजाना 4-5 कुंतल कबाड़ मोटरसाइकिल के जरिए कपड़े में ढंककर पार कराया जाता है।
लोगों का कहना है कि अगर पुलिस सिविल ड्रेस में निगरानी करे तो बड़ी आसानी से चोरी का माल पकड़ा जा सकता है।
ओबरा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बन रहा अपराधियों का अड्डा
बताया जा रहा है कि वर्ष 1997 में परियोजना प्रबंधन द्वारा बनाए गए इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के सामने दीवार खड़ी कर दी गई, जिससे दुकानदार बेरोजगार हो गए और दुकानें बंद पड़ी हैं।
अब यही बंद परिसर कबाड़ चोरों, नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। रात के समय यहां पूरी तरह अपराधियों का कब्जा रहता है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था नाम मात्र की रह गई है।
कबाड़ियों की ‘बाढ़’ और सवालों के घेरे में व्यवस्था
ओबरा नगर में दर्जन भर से अधिक कबाड़ की दुकानें संचालित हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या ये सभी दुकानें वैध हैं?क्या इनकी नियमित जांच होती है?
बाहर भेजे जाने वाले कबाड़ की कोई स्कैनिंग या चेकिंग होती है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चोरी का माल खुलेआम खपाया जा रहा है और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। बढ़ता डर, असुरक्षा का माहौल
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से लोगों में दहशत का माहौल है। घरों के बाहर रखे सामान, बंद मकान, क्रशर प्लांट, यहां तक कि वाटर पंप और एसी तक सुरक्षित नहीं हैं।
लोगों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो यह ‘कबाड़ चोरी’ संगठित अपराध का बड़ा रूप ले सकती है।
अब क्या होगा आगे?
यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अपराधियों में पुलिस का कोई डर नहीं रह गया है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दुस्साहसिक वारदात के बाद क्या ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी पुराने मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
About the Author
Tez Express News
Administrator
555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555555






