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100 साल पुरानी एक कंपनी जो अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही थी, उसे प्रधानमंत्री ने दुनिया की सबसे चर्चित ब्रांड बना दिया – वो भी मात्र 12 सेकेंड्स में।
मैंगो बाइट, किस्मी, पॉपिन्स, मेलोडी… मुंबई के विले पार्ले से निकली पार्ले हमारा बचपन है। बहुत कम लोगों को पता है कि ‘पार्ले’ मुंबई का ही एक उपनगर है, जिसके नाम पर कंपनी का नाम पड़ा। नब्बे वर्ष के विजय चौहान फ़िलहाल पार्ले प्रोडक्ट्स का संचालन कर रहे परिवार के मुखिया हैं।
इसी परिवार के मोहनलाल दयाल ने 1928 में इस कंपनी की स्थापना की और 1939 में Parle-G नाम की क्रान्ति हुई। उनके पोते विजय चौहान ₹83 हजार करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं, भारत के 31वें सबसे अमीर व्यक्ति। विजय चौहान के दादा मोहनलाल दयाल ने इस कंपनी स्थापना की थी, कोविड-19 के दौरान कंपनी ने 3 करोड़ बिस्किट पैकेट्स दान दिया। विजय चौहान MIT से मेकैनिकल इंजीनियर हैं, गोल्फ के शौक़ीन हैं और JRD टाटा के साथ खेल चुके हैं।
आज विजय चौहान के बेटे अजय, भतीजे समर और भतीजी अंबिका कंपनी को सँभाल रहे हैं। विदेशों में इनके मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। मध्य-पूर्व से लेकर मंगोलिया तक इनके उत्पादों की माँग है। 50+ ब्रांड्स हैं इनके। कंपनी ने अपना विज्ञापन बजट भी तीन गुना बढ़ाया है हाल में। भारत में इनके 7000+ डिस्ट्रीब्यूटर्स और 75 लाख आउटलेट्स हैं। उन्होंने गुणवत्ता बनाए रखी है, लगातार नए एक्सपेरिमेंट्स करते रहते हैं और इसीलिए आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं।
पार्ले हर साल 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक बिस्किट हर साल बेचता है, बाजार में भले ही ब्रिटानिया की हिस्सेदारी ज़्यादा हो लेकिन मात्रा के मामले में पार्ले भारी है। ये दुनिया का सबसे अधिक बिकने वाला सिंगल बिस्किट ब्रांड है। कन्फेक्शनरी उद्योग पर कभी यूरोप का दबदबा था, 1929 में 75 हज़ार रुपए में ख़रीदी गई एक फैक्ट्री ने अगले वर्ष ऑरेंज कैंडी लॉन्च किया और 1936 तक अपना टर्नओवर 50 हजार रुपए तक पहुँचा दिया। 3000 रुपए का मुनाफा उस वक़्त बड़ी बात थी।
विजय चौहान के भाई भी हैं – राज और शरद। 1970 के दशक में कंपनी बँटी तो पार्ले प्रोडक्ट्स की ज़िम्मेदारी इन्हीं तीनों ने सँभाली। जयंतीलाल के बेटे प्रकाश ने पार्ले एग्रो और रमेश ने पार्ले बिसलेरी का प्रबंधन सँभाला। पिछले ही साल इसने डार्क बिस्किट्स लॉन्च की। 2017 में भी प्रीमियम प्लैटिना रेंज लॉन्च किया गया था।
और हाँ, आज जिस पार्ले के शेयर्स बढ़ रहे हैं वो ये वाली कंपनी नहीं है। पार्ले समूह तो अबतक पब्लिक हुआ ही नहीं है। परिवार को अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता नहीं है। 125 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ साझेदारी करके पार्ले ने लागत बचाने का भी जुगाड़ कर लिया।
पार्ले-जी खाइए, मोनाको खाइए, मैरी खाइए, रस्क खाइए, हाइड एन्ड सीक खाइए, मैंगो बाइट खाइए – पार्ले ने पीढ़ियों के साथ रिश्ता बनाया है, उसके ग्राहक वफादार हैं ब्रांड के प्रति।
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