तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
लखनऊ/सोनभद्र। प्रदेश में लगातार बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने आपदा प्रबंधन तंत्र को हाई अलर्ट मोड पर लाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेशभर के अधिकारियों के साथ राजस्व, आपदा प्रबंधन और अर्ली वार्निंग सिस्टम की व्यापक समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में जनहानि नहीं होनी चाहिए और हर नागरिक की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक में मौसम विभाग की अत्याधुनिक तकनीकों — डोपलर वेदर रडार, एडब्ल्यूएस एवं एआरजी स्टेशन, सेटेलाइट इमेजिंग, लाइटनिंग सेंसर और अर्ली वार्निंग सिस्टम — के माध्यम से मौसम में हो रहे बदलावों और संभावित खतरों की जानकारी साझा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय रहते चेतावनी आम लोगों तक पहुंचना बेहद जरूरी है, ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकें और जान-माल की हानि को रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ने हाल के दिनों में प्राकृतिक आपदाओं से हुई जनहानि, पशु हानि और मकानों के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन तंत्र को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीन पर पूरी सक्रियता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि “आपदा मित्र” गांव-गांव में पूरी तरह सक्रिय रहें और पूर्व चेतावनी प्रणाली को पंचायत स्तर तक मजबूत किया जाए।
सरकार ने साफ किया कि अब गांव स्तर तक सूचना पहुंचाने के लिए व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसके तहत ग्राम प्रधान, पंचायत सहायक, सचिव, चौकीदार, सफाई कर्मी और लेखपालों को अलर्ट मोड में रखा जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम मजबूत करने, लोगों को लाउडस्पीकर और मोबाइल मैसेज के जरिए समय-समय पर चेतावनी देने और राहत आयुक्त व मौसम विभाग के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य में देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत लाभ दिया जाए। भूमिहीन प्रभावित परिवारों को पट्टा उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए।
इधर मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद सोनभद्र में भी प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आया। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ समीक्षा कर आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव-गांव तक सूचना तंत्र को सक्रिय रखा जाए और किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तत्काल प्रशासन तक पहुंचाई जाए।
जिलाधिकारी ने तालाब, पोखरों, झीलों और कुओं के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाने, स्कूलों और सरकारी राशन दुकानों में “क्या करें और क्या न करें” संबंधी जागरूकता अभियान चलाने तथा लोगों को आपदा से बचाव का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग और अग्निशमन विभाग को संयुक्त रूप से सतर्क रहने को कहा गया।
प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम में अचानक बदलाव, आंधी-तूफान, भारी बारिश और बिजली गिरने जैसी घटनाओं को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। सरकार का फोकस अब केवल राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समय रहते चेतावनी देकर हर संभव नुकसान को रोकने पर रहेगा।





