मारकुंडी से बलुई तक आवागमन बाधित होने का दावा, महिलाओं-बच्चों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे कलेक्ट्रेट, पैमाइश कर अतिक्रमण हटाने की उठाई मांग

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

गुरमा/सोनभद्र। सदर विकासखंड के न्याय पंचायत सलखन क्षेत्र में कथित रूप से सार्वजनिक आवागमन मार्ग पर हुए अतिक्रमण को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। मारकुंडी समेत आसपास के कई गांवों के महिला-पुरुष ग्रामीण ग्राम प्रधान उद्यम सिंह यादव के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिस रास्ते से वर्षों से ग्रामीणों का आवागमन होता रहा है, उसी मार्ग पर अवैध रूप से पक्की बाउंड्री बनाकर रास्ता बंद कर दिया गया है, जिससे हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग केवल एक गांव नहीं, बल्कि मारकुंडी, बलुई, बजरटोला, मधुबन, महुअरिया, गुरुदह सहित कई बस्तियों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। उनके अनुसार पीढ़ियों से लोग इसी रास्ते का उपयोग स्कूल, अस्पताल, बाजार, खेत और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए करते रहे हैं, लेकिन रास्ता बंद होने के बाद लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रास्ता अवरुद्ध होने से सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को झेलनी पड़ रही है। बच्चों को विद्यालय पहुंचने में अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, मजदूरी करने वाली महिलाओं का समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं, जबकि किसी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन, कृषि कार्य और दैनिक आवश्यकताओं से जुड़े अन्य काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर पहले भी कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, चकबंदी विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने रास्ता बंद किए जाने का विरोध किया तो कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और धमकियां भी दीं।
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि विवादित भूमि की राजस्व विभाग से निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए। यदि जांच में यह स्पष्ट हो कि सार्वजनिक मार्ग अथवा नाले की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तो उसे तत्काल हटाया जाए और मारकुंडी मुख्य मार्ग से बलुई गांव तक आवागमन को पहले की तरह सुचारु कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को विवश होंगे।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में सार्वजनिक रास्ता बहाल कराने की मांग दोहराई।
नोट: इस समाचार में लगाए गए सभी आरोप प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। समाचार लिखे जाने तक संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों अथवा आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और राजस्व पैमाइश के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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