अडानी एसीसी सीमेंट कंपनी के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, 10 सूत्रीय मांगों पर कंपनी गेट पर अनशन शुरू

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

डाला/सोनभद्र। डाला क्षेत्र स्थित अडानी एसीसी सीमेंट कंपनी के मुख्य द्वार पर मंगलवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। पंकज यादव के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से स्थानीय लोगों की समस्याओं और जनहित से जुड़े मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे लोगों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
अनशन पर बैठे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार संबंधित अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन के समक्ष अपनी मांगें रखी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी दस सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक क्रमिक अनशन जारी रहेगा।
आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, प्रभावित परिवारों को उचित सुविधाएं, क्षेत्रीय विकास कार्यों में तेजी, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि उद्योग स्थापित होने के बाद भी आसपास के गांवों के लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत क्षेत्र में विकास कार्यों को और प्रभावी बनाया जाए तथा स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की लगातार अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की होगी।
क्रमिक अनशन के दौरान क्षेत्र में हलचल का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों की आवाजाही के बीच आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास और स्थानीय जनता के अधिकारों की लड़ाई है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से भी हस्तक्षेप कर कंपनी प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच सकारात्मक वार्ता कराने की मांग की, ताकि समस्या का शीघ्र समाधान निकल सके और क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे।
अनशन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्र के लोग मौजूद रहे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। अब सभी की निगाहें कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की आगामी पहल पर टिकी हैं कि आखिर ग्रामीणों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

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