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कानपुर देहात/गायत्री शुक्ला
साकेत धाम शिवली में बुधवार को महर्षि बाल्मीकि जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।कार्यक्रम में पहुंचीं विधायिका प्रतिभा शुक्ला।जिलाधिकारी जे.पी सिंह ने विधि विधान से पूजा अर्चना किया और महर्षि वाल्मीकि के जीवन के बारे में लोगों को बताया।तदोपरांत आचार्यों ने रामायण पाठ का शुभारंभ किया।
आचार्य अनिल दीक्षित ने कहा कि व्यक्ति चरित्र से अच्छा बुरा होता है।महर्षि बाल्मीकि के प्रारंभिक जीवन को देखें तो वह लुटेरे के रूप में समाज को लूट कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, जैसा मानस कहती है कि एक घड़ी आधी घड़ी आधी में पुनि आध तुलसी संगत साधु की हरे कोटि अपराध।उन्होंने बताया कि लूट की लत में लगे हुए महर्षि बाल्मीकि को कुछ संत रास्ते से जाते दिखे,जिन्हें उन्होंने तेज आवाज में रोका और कहा जो कुछ तुम्हारे पास है रख दो वरना जान से हाथ धोना पड़ेगा।इस पर संतों ने उनसे कहा कि बच्चा यह जघन्य अपराध है।तुम यह किसके लिए करते हो तब बाल्मीकि ने अपने परिवार के भरण पोषण की बात कही तो संतों ने कहा कि इस कार्य में तुम्हारे परिवार के लोग सहभागी हैं।अपने परिवारीजनों से पूछ कर देखो बाल्मीकि ने संतों को बांध दिया और परिवार से पूछने गए कि मैं जो धन लाकर आपकी जीविका चलाता हूं उसमें आप सब सहभागी हैं तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे कार्य में हम सहभागी नहीं है, तब बाल्मीकि के ज्ञान चक्षु खुल गए और वापस आकर संतों को दंडवत प्रणाम करके भूल की क्षमा मांगी।विधायिका व डी.एम ने कहा कि हमें महर्षि बाल्मीकि के जीवन से सीख लेनी चाहिए कि प्रभु व नेकी का मार्ग ही सबसे बेहतर होता है। इस मौके पर एसडीएम विजय प्रताप त्रिपाठी, आचार्य डा. योगेश मिश्रा,डा. रामनरेश त्रिपाठी,डा. राजेश शुक्ला,राहुल त्रिपाठी, मनीष तिवारी,सौरभ अग्निहोत्री,अर्पित शुक्ला,शुभम शर्मा ने सुंदरकांड का संस्कृत पाठ किया। कार्यक्रम में साकेत धाम के महंत संत कुमार ने डीएम व एसडीएम को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।






