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केतार से प्रदीप कुमार की रिपोर्ट
केतार /गढ़वा
झारखण्ड स्थापना दिवस पर आज मंगलवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर केतार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया|कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया एवं मौके पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्वरूप पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके कृतियों को याद किया। तथा स्कूल के बहनों के द्वारा अतिथि वंदना से अतिथियों का स्वागत किया गया। तत्पश्चात आदिवासी समुदाय के लोगों को अतिथियों के द्वारा अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया। एवं झारखंड स्थापना दिवस पर स्कूल के भैया बहनों के द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया गया। वहीं मौके पर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष बबलू सिंह ने भगवान बिरसा मुंडा की जीवनी के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि इनका जन्म मुंडा जनजाति के गरीब परिवार में पिता-सुगना पुर्ती(मुंडा) और माता-करमी पुर्ती(मुंडा) के सुपुत्र बिरसा पुर्ती (मुंडा) का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखण्ड के खुटी जिले के उलीहातु गाँव में हुआ था। उन्होंने कहा कि अत्याचार के खिलाफ अंग्रेजी हुकूमत की जड़े हिलाने वाले अमर बलिदानी धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के आदर्श और सीख सदियों तक लोगों को यातना और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा भारतीय संस्कृति के पक्षधर एवं रक्षक थे। मुख्य अतिथि इंस्पेक्टर चंदन कुमार सिंह ने स्कूल के भैया बहनों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी। वहीं सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के सचिव कामेश्वर सिंह ने झारखंड स्थापना की शुभकामनाएं देते हुए बताया कि : हर साल 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस मनाया जाता है. साल 2000 में झारखंड राज्य की स्थापना हुई थी, इस साल राज्य अपना 22वां स्थापना दिवस मना रहा है.आदिवासी राज्य झारखंड में 24 जिले हैं और झारखंड का कुल क्षेत्रफल लगभग 79,716 वर्ग किलोमीटर है.क्षेत्रफल के आधार पर देश का 15वां सबसे बड़ा राज्य है.झारखंड के अद्भुत झरने, पहाड़ी, वन्य जीव, अभ्यारण, दामोदर नदी पर पंचेत बांध और पवित्र स्थान जैसे बैद्यनाथधाम, पारसनाथ रजरप्पा जैसे क्षेत्र राज्य के पर्यटक आकर्षण के लिए जाने जाते हैं.झारखंड राज्य कोयला, लौह अयस्क, तांबा अयस्क, यूरेनियम, अभ्रक, बॉक्साइट, ग्रेनाइट पत्थर, चांदी और डोलोमाइट जैसे मिनरल सोर्स से समृद्ध राज्य है।






