म्योरपुर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय में 7 साल से लापता शिक्षिका का बच्चे कर रहे खोज

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तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ –
म्योरपुर/सोनभद्र (मिथलेश कुमार)
म्योरपुर ब्लॉक के आरंगपानी विद्यालय द्वितीय का है। जहां तैनात शिक्षिका पिछले 7 साल से बिना स्कूल आए ही हर महीने वेतन उठा रही है। प्रधानाध्यापक, अभिभावक और बच्चे 7 साल से विद्यालय में तैनात शिक्षिका को नहीं देखे हैं लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी शिक्षिका को प्रतिदिन उपस्थित बताकर 28 मार्च से मेडिकल अवकाश पर बता रहे हैं। मामला बुधवार को तब खुला जब अभिभावकों की शिकायत पर बीजेपी कार्यकर्ताओं की टीम स्कूल पहुंची और वहां तैनात संकुल शिक्षक रामप्रसाद ने विद्यालय पर 2017 से एकल अध्यापक होने का दुखड़ा सुनाया जाने लगा। रामप्रसाद और अभिभावकों ने बताया कि 2017 से वह अकेली ही विद्यालय में कार्य कर रहे हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात तब सामने आई जब बीआरसी म्योरपुर से पता चला कि उक्त विद्यालय पर एक शिक्षिका 7 साल से तैनात है मजे की बात है कि 27 मार्च तक वह शिक्षिका कागज पर विद्यालय में उपस्थित है। लेकिन बच्चों को पढ़ाने 7 साल से स्कूल नहीं गई है। 29 मार्च को बीजेपी कार्यकर्ताओं की स्कूल पहुंचने के बाद 29 मार्च की शाम मेडिकल लगा कर 1 अप्रैल तक मेडिकल अवकाश दिखाकर खंड शिक्षा अधिकारी जिस तरह से भगोड़े शिक्षकों को बचाने का प्रयास किया गया उससे साफ प्रतीत होता है। कि वह सरकार के निपुण भारत अभियान और बच्चों के भविष्य के प्रति कितने लापरवाह तरीके से कार्य करते है। फिलहाल बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि विद्यालय को और शिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा,लेकिन ग्रामीणों को 7 साल से स्कूल ना आने वाली शिक्षिका के 3 अप्रैल को विद्यालय पहुंचने का बेसब्री से इंतजार है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार शिक्षा के प्रति पूरी तरह गंभीर है। ऐसे भगोड़े शिक्षक जो दिल्ली,मुंबई,बनारस,इलाहाबाद आदि शहरों में अपना धंधा पानी करते है और वेतन इंसेंटिव के रूप में प्राप्त करते है।

क्यों दिया जा रहा भगोड़े शिक्षकों को संरक्षण।

म्योरपुर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय चेतवा का है,जहां छात्र अनुपात में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या होने के बाद भी मानकों की अनदेखी कर शिक्षक को अटैच किया गया। शिक्षक वहां भी नहीं जाते थे। इसलिए प्रधानाध्यापक द्वारा मूल विद्यालय पर जाने के लिए 2 माह पहले रिलीव कर दिया गया, लेकिन उक्त शिक्षक आज तक अपने मूल विद्यालय पर भी नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में सवाल अब उठने लगा है की शिक्षक कहां रह कर प्रतिमाह वेतन उठा रहे हैं।इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी म्योरपुर ने एक बार फिर भगोड़े शिक्षकों को संरक्षण देते हुए बताया कि उक्त शिक्षक को अभी चेतवा विद्यालय से रिलीव नहीं किया गया है। फिलहाल जांच के बाद ही सच और झूठ का पर्दा उतर सकेगा, लेकिन अटैच के नाम पर म्योरपुर के स्कूलों में चल रहे खेल का पर्दाफाश होना आवश्यक हो गया है।

जांच का विषय:कौन करता है, भगोड़ों का हस्ताक्षर।
कई सालों से भगोड़े शिक्षकों का फर्जी हस्ताक्षर कौन करता है,यह म्योरपुर में गम्भीर जांच का विषय बनता जा रहा है।बच्चे, अभिभावक विद्यालय के स्टाफ भगोड़ों शिक्षकों के बारे में चिल्ला-चिल्ला कर बता रहे है लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी म्योरपुर द्वारा उपस्थित पंजिका में हस्ताक्षर होने का हवाला दे कर जांच की दुहाई दी जा रही है। म्योरपुर ब्लाक में आरंगपानी द्वितीय में शिक्षकों के हस्ताक्षर और चेतवा विद्यालय में शिक्षक के हस्ताक्षर होने का दावा करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी के बातें सच हुई तो यह भी सच है कि विद्यालयों में उक्त लापता शिक्षकों का हस्ताक्षर कोई कर रहा है।मामला शिक्षकों की कमी झेल रहे सोनभद्र में बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसलिए साहब की कृपा दृष्टि से भागते फिर रहे शिक्षकों पर करवाई कर उन्हें ब्लैकबोर्ड तक पहुंचाना हर नागरिक का दायित्व बनता है। कार्यकर्ताओं ने म्योरपुर मंडल अध्यक्ष मोहरलाल खरवार बभनी मंडल अध्यक्ष प्रमोद कुमार दुबे को बताया।उन्होंने जांच करा कर जल्द ही कारवाई कराने की मांग की है।

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