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केतार से प्रदीप चन्द्रवंशी की रिपोर्ट –
केतार झारखंड निर्माता दिशोम गुरु की दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हुआ। उनकी निधन कि खबर झारखंड सहित अन्य राज्यों में शोकाकुल किया। इस दौरान झामुमो प्रखंड केतार ने शोक सभा का आयोजन किया। झारखंड निर्माता दिशोम गुरु कहे जाने वाले आंदोलन कारी पूर्व मुख्यमंत्री 81 वर्षीय स्व शिबू सोरेन की निधन पर दिल्ली सर गंगाराम अस्पताल में प्रधानमंत्री सहित देश के बड़े बड़े नेताओं ने पहुंच कर उनको पुष्पांजलि अर्पित कर अंतिम नमन किया। आइए जानते हैं झामुमो संस्थापक दिशोम गुरु स्व शिबू सोरेन की इतिहास के बारे में।स्व शिबू सोरेन एक प्रमुख भारतीय राजनेता थे जिन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की। उनका जन्म 11 जनवरी 1944 को झारखंड के गोड्डा जिले के नेमोरा गांव में हुआ था। उनके पिता सोबरन मांझी एक शिक्षक थे जो महाजनी प्रथा का विरोध करते थे और उनकी हत्या 1957 में कर दी गई थी। इस घटना ने स्व सोरेन की जीवन को एक नया मोड़ दिया और वे सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित हुए।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना उन्होंने 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की, जिसका उद्देश्य झारखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना था।
उन्होंने महाजनी प्रथा और सूदखोरी के खिलाफ आंदोलन चलाया, जिसे धनकटनी आंदोलन के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन ने उन्हें आदिवासी समाज का नायक बना दिया।
स्व शिबू सोरेन ने पहली बार 1977 में लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में वे 1980 में लोकसभा सांसद चुने गए और इसके बाद कई बार सांसद और राज्यसभा सदस्य बने,
उनके संघर्ष और आंदोलन के कारण सन 2000 में झारखंड राज्य अस्तित्व में आया। उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए काम किया और उन्हें दिशोम गुरु की उपाधि दी गई, जिसका अर्थ है दसों दिशाओं का गुरु।
स्व शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत उनके परिवार के माध्यम से जारी है, जिनमें उनके बेटे हेमंत सोरेन झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री हैं।






