तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र दुद्धी बिल्ली मारकुंडी पत्थर खदान में हुए भयानक दुर्घटना ने पूरे जिले और आसपास के क्षेत्र को झकझोर दिया है। 15 नवंबर 2025 को खदान के धंसने से सात मजदूरों की मौत हो गई, जिससे स्थानीय परिवारों और समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद राष्ट्रीय चेरी जनजाति महासंघ ने मुख्यमंत्री को लिखित पत्र भेजकर इस घटना को अत्यंत गंभीर प्रशासनिक विफलता करार देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और खनन माफिया पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीराम चेरी ने अपने पत्र में बताया कि सोनभद्र जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां लोग लंबे समय से गरीबी और विकास के अभाव से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि खनन विभाग की लापरवाही और अवैध खनन गतिविधियों का नतीजा है। हरीराम चेरी का आरोप है कि हादसे के दिन प्रधानमंत्री का कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर लाइव प्रसारित हो रहा था, तब खनन कार्य पूरी तरह से रोक दिया जाना चाहिए था। लेकिन खनन विभाग की मिलीभगत से अवैध तरीके से खदानों में काम जारी था, जिससे भारी चट्टान धंस गई।नीरव हृदय कर देने वाली इस घटना में सात मजदूर मौके पर ही अपनी जान गंवा बैठे, जिनमें से अधिकांश आदिवासी समुदाय से थे। महासंघ ने बताया कि कई दिन गुजर जाने के बावजूद मृतकों के परिवारों को मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद अभी तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है, जो समुदाय के प्रति उपेक्षा और संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है।राष्ट्रीय चेरी जनजाति महासंघ ने आग्रह किया है कि प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए, ताकि वे इस भारी नुकसान से उबर सकें। साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि जिन अधिकारियों, कर्मचारियों और खनन ठेकेदारों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण यह हादसा हुआ, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। महासंघ ने चेतावनी दी है कि बिना सख्त कार्रवाई के भविष्य में इस तरह की त्रासदियों को रोका नहीं जा सकेगा।महासंघ के अनुसार, यह केवल मुआवजे की मांग नहीं बल्कि आदिवासी समाज की सुरक्षा, सम्मान और न्याय की लड़ाई है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए खनन प्रक्रियाओं का सख्ती से निरीक्षण हो और अवैध खनन पूरी तरह बंद किया जाए।स्थानीय प्रशासन की इस मामले में कार्यवाही अभी तक सीमित रही है, लेकिन इस पत्र के माध्यम से राष्ट्रीय चेरी जनजाति महासंघ ने जनता का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा है और समाधान की मांग की है। सोनभद्र के लोग और मृतकों के परिजन न्याय और सुरक्षा की इस अपील के साथ आगे आ रहे हैं, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह के दर्दनाक हादसे से प्रभावित न हो।इस बीच, पुलिस और खनन विभाग ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें कई स्थलों पर जांच पड़ताल और अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को अस्थायी राहत राशि देनी शुरू कर दी है, लेकिन यह राशि महासंघ की मांग से काफी कम बताई जा रही है।यह हादसा सोनभद्र जिले में खनन और मजदूर सुरक्षा को लेकर चल रहे सवालों को और तेज कर गया है, जहां अवैध खनन और खनन माफिया की सक्रियता बरसों से ऐसी घटनाओं को जन्म देती आ रही है। राज्य सरकार और प्रशासन पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वे मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और खनन विभाग की काली करतूतों को समाप्त करें।






