तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। शुक्रवार 28 नवंबर 2025 को जनपद कारागार सोनभद्र में मासिक जेल लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर जेल का निरीक्षण करते हुए बंदियों से उनकी परेशानी, स्थिति और उनके मुकदमों के बारे में जानकारी ली गई तथा उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभों से भी अवगत कराया गया।अपर जनपद न्यायाधीश और सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र, शैलेन्द्र यादव ने जेल में बंद कैदियों के लिए विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में शैलेन्द्र यादव ने कैदियों को ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं और चल रही योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी, जिससे वे अपने कानूनी अधिकारों और सहायता से सजग हो सकें।इस मौके पर मासिक जेल लोक अदालत में आलोक यादव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनभद्र ने कुल चार मामले चिन्हित किए। इनमें से तीन अभियुक्तों ने जुर्म स्वीकार करते हुए अपने मुकदमों को अंतिम रूप से निस्तारित कराया। यह पहल जेल में न्याय की शीघ्रता और प्रक्रिया की पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।जिला कारागार के निरुद्ध सिद्ध दोष बंदियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनके अपील मामलों व मुकदमों की स्थिति समझी गई। अपर जनपद न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शैलेन्द्र यादव ने जेलर को निर्देश दिए कि जिन कैदियों के पास अपने मुकदमों के लिए प्राइवेट अधिवक्ता रखने का आर्थिक साधन नहीं है, उन्हें नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रार्थना पत्र संबंधित न्यायालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजे जाएं।कार्यक्रम में जेलर अरविंद कुमार सिंह, उप कारागार पाल गौरव कुमार, अखिलेश कुमार पांडेय एवं जयप्रकाश, असिस्टेंट लीगल एट डिफेंस काउंसिल सोनभद्र उपस्थित रहे।शैलेन्द्र यादव ने बताया कि इस मासिक जेल लोक अदालत आयोजन का कार्यान्वयन जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राम सुलीन सिंह के निर्देशन में किया गया, जिससे न्याय व्यवस्था को बंदी तक पहुंचाना और न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाना सुनिश्चित किया जा रहा है।यह पहल सोनभद्र जिले में न्याय सेवा के पारदर्शी एवं सुलभ वितरण का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों की कानूनी सहायता सुनिश्चित करता है। इस प्रकार के आयोजन से न्यायालय और जेल प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है और बंदियों का सामाजिक पुनर्वास भी संभव होता है।






