तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र
जनपद सोनभद्र में बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए आज दिनांक 22-12-2025 को बायोमेडिकल वेस्ट समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्साधिकारी, सोनभद्र द्वारा की गई। यह बैठक मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में सम्पन्न हुई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी प्रमुख हितधारकों की उपस्थिति रही।
बैठक में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के क्षेत्रीय प्रतिनिधि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सचिव डॉ० एच० पी० सिंह, मातृ एवं शिशु विंग हैरीटेज चिकित्सालय के प्रतिनिधि, जनपद के समस्त सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रतिनिधि, निजी चिकित्सालयों के नोडल अधिकारी, राजकीय मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर तथा सी०पी०सी० पावर इंडिया प्रा० लि० के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।बैठक के दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा जनपद में संचालित सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों में बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की गई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट का अनुचित निस्तारण न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। इस विषय में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।मुख्य चिकित्साधिकारी ने सी०पी०सी० पावर इंडिया प्रा० लि० को निर्देशित किया कि वह जनपद के प्राथमिक चिकित्सालयों एवं समस्त सरकारी चिकित्सालयों का स्पष्ट रूट चार्ट तैयार कर, समयबद्ध तरीके से बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण सुनिश्चित करे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जहां-जहां लॉगबुक उपलब्ध नहीं कराई गई है, वहां तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में लापरवाही पाए जाने पर सी०पी०सी० पावर इंडिया प्रा० लि० के प्रतिनिधि को कड़ी चेतावनी भी दी गई।वहीं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि को निर्देशित किया गया कि दिनांक 31 दिसम्बर 2025 तक जनपद के समस्त पात्र चिकित्सालयों को अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) निर्गत करने की प्रक्रिया हर हाल में पूर्ण कर ली जाए, ताकि अस्पतालों के पंजीकरण से संबंधित कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो।बैठक में आईएमए के प्रतिनिधि को भी स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया कि जनपद के सभी निजी चिकित्सालय कम से कम 05 वर्ष की अवधि का अनापत्ति प्रमाण-पत्र उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनिवार्य रूप से प्राप्त कर लें, जिससे अस्पताल पंजीकरण की प्रक्रिया समय से पूरी की जा सके।मुख्य चिकित्साधिकारी ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी निजी लैब, दंत चिकित्सालय एवं आयुष चिकित्सक अपने बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण शासन द्वारा निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप करें तथा शीघ्र ही यूपीपीसीबी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा में नियमों का पालन नहीं किया गया, तो कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए संबंधित अस्पताल/संस्थान का पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा।बैठक के अंत में मुख्य चिकित्साधिकारी ने सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि जनपद को स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने के लिए बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।इस बैठक को जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं निर्णायक कदम माना जा रहा






