तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र रॉबर्ट्सगंज, 23 जनवरी 2026: वसंत पंचमी के पावन पर्व पर सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज स्थित होटल डीआर ड्रीम्स लग्जरी बैंक्वेट में आयोजित भव्य समारोह में जिले के गौरवशाली अतीत को समेटे ‘सोनभद्र के इतिहास’ पुस्तक का लोकार्पण हर्षोल्लास के साथ किया गया। यह समारोह न केवल साहित्यिक जगत के लिए महत्वपूर्ण रहा, बल्कि जिले की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ। सभाध्यक्ष पूर्व कुलपति एवं पद्मश्री अभिराज राजेंद्र मिश्र के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में जिला प्रशासन, पुलिस महकमे और सामाजिक क्षेत्र के प्रमुख हस्ताक्षरों ने शिरकत की।प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थितिकार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण और वसंत पंचमी की बधाई संदेशों से हुई। मुख्य अतिथि के रूप में ओडिशा के पूर्व डीडीजी एवं महामहोपाध्याय अरुण कुमार उपाध्याय ने पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण किया। जिलाधिकारी श्री बीएन सिंह ने कहा कि सोनभद्र का इतिहास आदिवासी संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम और प्राकृतिक संपदा से भरा पड़ा है, और ऐसी पुस्तकें युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ेंगी। पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक वर्मा ने जोर देकर कहा कि जिले का इतिहास अपराध नियंत्रण और विकास की कहानी भी कहता है, जो वर्तमान प्रशासन के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा।अतिविशिष्ट अतिथि पूर्व आयुक्त योगेश्वर राम मिश्र ने पुस्तक लेखक की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह ग्रंथ सोनभद्र की अनछुई कथाओं को सामने लाता है, जो पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाएगा। विशिष्ट अतिथि पूर्व डीजीपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से कानून व्यवस्था की मजबूती पर बल दिया। नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती रूबी प्रसाद ने महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि सोनभद्र का इतिहास नारी शक्ति से भी अटूट है। राजा चंद्र विक्रम पद्मशरण शाह और युवराज देवांशब्रह्म की शाही परंपराओं से जुड़ी उपस्थिति ने समारोह को राजसी रंग प्रदान किया।पुस्तक का महत्व और लेखक का संकल्प’सोनभद्र के इतिहास’ पुस्तक सोनभद्र के प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक विकास तक की यात्रा को विस्तार से चित्रित करती है। लेखक ने वर्षों की खोज और स्थानीय बुजुर्गों के साक्षात्कारों के आधार पर इसे तैयार किया है। पद्मश्री अभिराज राजेंद्र मिश्र ने सभापतित्व करते हुए कहा, “यह पुस्तक सोनभद्र की पहचान को मजबूत करेगी। वसंत पंचमी का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह ज्ञान और विद्या का प्रतीक है।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्थानीय इतिहास को पढ़ें और संरक्षित करें।कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों द्वारा सरस्वती वंदना और लोकगीत प्रस्तुत किए गए। अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन कर लेखक को शुभकामनाएं दीं। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें सभी ने सोनभद्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।सोनभद्र के इतिहास की झलकसोनभद्र, जिसे भारत का ऊर्जा केंद्र कहा जाता है, का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। यहां के ओबरा, रेणुकूट और डाला गुफाएं पुरातात्विक महत्व की हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में स्थानीय जनजातियों का योगदान अविस्मरणीय है। पुस्तक इन सभी पहलुओं को प्रमाणिक स्रोतों के साथ प्रस्तुत करती है, जो शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगी।यह आयोजन सोनभद्र की सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने वाला सिद्ध हुआ। जिला प्रशासन ने ऐसी पहलों को प्रोत्साहन देने का आश्वासन दिया।क्या आप इस खबर में कोई विशेष कोण (जैसे जिलाधिकारी के उद्गार या इतिहास के किसी हिस्से पर अधिक फोकस) जोड़ना चाहेंगे या इसे छोटा/लंबा बनाना चाहते हैं?






