डिजिटल साक्षरता और गुणवत्ता से उद्यमी महिलाएं छूएंगी नई ऊंचाइयां: सीडीओ जागृति अवस्थी

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र। महिला सशक्तिकरण की नई लहर को गति देने के लिए डायट परिसर, रॉबर्ट्सगंज में दो दिवसीय ‘सरस मेला’ का भव्य आयोजन किया गया। इस मेले का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) जागृति अवस्थी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की ‘लखपति दीदियों’ के उत्पादों का प्रमुख आकर्षण बना। मेले में स्थानीय हस्तशिल्प, जैविक खाद्य पदार्थ, हर्बल उत्पाद और पारंपरिक व्यंजनों से सजे स्टॉल्स ने हजारों ग्रामीणों और शहरवासियों को खींचा, जिससे महिलाओं के हुनर को नई पहचान मिली।सीडीओ जागृति अवस्थी ने स्टॉल्स का बारीकी से निरीक्षण किया और उद्यमी महिलाओं से उनकी मेहनत व उत्पादों की गुणवत्ता की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, “आज के डिजिटल युग में उद्यमी महिलाओं को गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल माध्यमों का सहारा लेना होगा। डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन भुगतान और आय-व्यय का सुव्यवस्थित लेखा-जोखा रखें, तभी आप बाजार की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगी और नई ऊंचाइयां छू सकेंगी।” उनके इस संदेश ने मौजूद महिलाओं में उत्साह का संचार कर दिया।मेले में सोनभद्र जिले के विभिन्न ब्लॉकों—दुद्धी, चोपन, म्योरपुर, रॉबर्ट्सगंज आदि से आई लगभग 50 लखपति दीदियों ने अपने स्टॉल्स लगाए। इनमें आकांक्षा ग्रुप की जैविक अचार-मुरब्बे, सावित्री ग्रुप के हस्तनिर्मित बैग्स, लक्ष्मी ग्रुप के हर्बल साबुन और कई अन्य उत्पाद प्रमुख थे। एक दीदी ने बताया, “पहले हमारे उत्पाद गांव तक सीमित थे, लेकिन सरस मेले ने हमें बड़े बाजार से जोड़ा। अब हम यूपीआई से पेमेंट ले रहे हैं और फेसबुक पर ऑर्डर बुक कर रहे हैं।” मेले में 500 से अधिक खरीदार पहुंचे, जिससे महिलाओं को लाखों का कारोबार हुआ।यह आयोजन जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। एनआरएलएम के तहत पिछले दो वर्षों में सोनभद्र में 10 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं, जिनकी मासिक आय 1 लाख से ऊपर पहुंची है। सीडीओ ने बताया कि मेले के माध्यम से डिजिटल साक्षरता पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जहां महिलाओं को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट और स्थानीय ऐप्स का प्रशिक्षण दिया गया। “डिजिटल इंडिया का सपना तभी साकार होगा जब ग्रामीण महिलाएं डिजिटल साक्षर हों,” उन्होंने जोर देकर कहा।मेले का दूसरा दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, उत्पाद प्रदर्शनियों और विशेषज्ञ लेक्चर्स से सजा। जिला उद्योग केंद्र और बैंक प्रतिनिधियों ने ऋण योजनाओं की जानकारी दी, जबकि एनआईसी विशेषज्ञों ने डिजिटल मार्केटिंग पर सेशन चलाए। आयोजन ने न केवल ग्रामीण उत्पादों को मंच प्रदान किया, बल्कि महिलाओं में आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और डिजिटल आत्मविश्वास जगाया। स्थानीय व्यापारियों ने भी इन उत्पादों की थोक खरीदारी की, जो भविष्य में निरंतर आपूर्ति का वादा करता है।सोनभद्र जैसे खनिज समृद्ध लेकिन पिछड़े जिले में यह मेला आर्थिक क्रांति का प्रतीक बन गया है। सीडीओ ने घोषणा की कि ऐसे मेले अब मासिक आधार पर आयोजित होंगे, ताकि लखपति दीदियां राष्ट्रीय स्तर पर चमकें। यह आयोजन नारी शक्ति को सलाम करता है, जो डिजिटल क्रांति की धारा में बहते हुए नई कहानी लिख रही हैं।

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