तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – विष्णु गुप्ता
बीजपुर (सोनभद्र)जनपद के जरहा वन रेंज क्षेत्र अंतर्गत डोडहर ग्राम पंचायत के खैरी गांव से प्रकृति के हरे हरे पेड़ों व पहाड़ों को खिलवाड़ की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।यहा कुदरती ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों को काटकर मिट्टी उठाने का काला कारोबार धड़ल्ले से जारी है।इस प्रक्रिया में न केवल भौगोलिक संरचना को बदला जा रहा है, बल्कि सैकड़ों साल पुराने पहाड़ पर खड़े हरे-भरे पेड़ों को भी नेस्तनाबूद किया जा रहा है।हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले पर वन विभाग का तर्क गले उतरने वाला नहीं है।विभाग का कहना है कि पहाड़ों को काटकर और समतलीकरण करके उस स्थान पर जापानी तकनीक से नए पेड़ लगाए जाएंगे।वन विभाग के इस तर्क पर ग्रामीणों ने आक्रोश और आश्चर्य व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि जो पेड़ सैकड़ों वर्ष से पर्यावरण को ऑक्सीजन दे रहे हैं और क्षेत्र की पहचान हैं उन्हें काटकर नए पौधे लगाना कहा का तर्क संगत है क्या नए पौधों को पुराने वृक्षों के बराबर विशाल होने में फिर से सैकड़ों साल नहीं लगेंगे समतलीकरण के नाम पर पहाड़ों की मिट्टी का जो उठाव हो रहा है उसका असली लाभार्थी कौन है।क्षेत्र में वर्षों से पहाड़ों को काटने का यह खेल बदस्तूर जारी है।प्राकृतिक ऊंचे पहाड़ों के अस्तित्व को मिटाकर पारिस्थितिक तंत्र के साथ बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।जानकारों का मानना है कि यदि इसी तरह प्राकृतिक संपदा को नष्ट किया गया तो आने वाले समय में क्षेत्र को गंभीर पर्यावरणीय परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।सैकड़ों साल पुराने पेड़ों को काटकर नए पेड़ लगाने की बात कहना हास्यास्पद है।यह सीधे तौर पर प्रकृति की हत्या है और इसके पीछे किसी बड़े खेल की बू आ रही है।
समतलीकरण की आड़ में चल रहे मिट्टी के कारोबार पर अगर समय रहते अंकुश नही लगेगा तो एक दिन यहाँ खड़े ऊचे ऊंचे पहाड़ दफन हो जाएंगे।इस बाबत रेंजर सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि उक्त भूमि एनटीपीसी की है एनटीपीसी अपनी जमीन को समतल कराकर मियावाकि पद्धति से उक्त जमीन पर पेड़ लगवाएगा उक्त जमीन पर वन विभाग का कोई लेना देना नही है।






