तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनीओबरा, सोनभद्र जिले के ओबरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिल्ली मारकुंडी बगमनवा
स्थित गांव में टीबी (क्षय रोग) की लाइलाज बीमारी से जूझ रहे एक 25 वर्षीय युवक ने रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक जितेंद्र कुमार पुत्र स्वर्गीय राम लल्लू निवासी ग्राम बीमारकुंडी, ओबरा भगवानवा का शव पेड़ से लटका मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने सुबह होते ही शव की खोजबीन की और सूचना पुलिस को दी।घटना की जानकारी मिलते ही ओबरा थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में पता चला कि जितेंद्र लंबे समय से टीबी से पीड़ित था और इलाज के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। आर्थिक तंगी और बीमारी की चपेट में आने से मानसिक रूप से परेशान जितेंद्र ने गुरुवार रात को ही यह कदम उठा लिया। ग्रामीणों के अनुसार, जितेंद्र मजदूरी का काम करता था और परिवार में उसकी पत्नी व दो छोटे बच्चे हैं, जो अब बेसहारा हो गए हैं।परिवार का रो-रोकर बुरा हाल, गांव में शोक की लहरमृतक के चचेरे भाई रामू ने बताया, “जितेंद्र को करीब एक साल से टीबी हो गया था। सरकारी अस्पताल में दवाइयां चल रही थीं, लेकिन खांसी और कमजोरी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी। वह अक्सर कहता था कि अब जीना मुश्किल हो गया है। रात को खाना खाकर वह घर से निकला और पास के बिल्ली मारकुंडी बाग में चला गया। सुबह ग्रामीणों ने पेड़ पर लटका शव देखा तो चीख-पुकार मच गई।” परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जितेंद्र की पत्नी सीता देवी ने कहा, “हम गरीब हैं, इलाज के लिए कर्ज लिया था। वह हमेशा कहता था कि बीमारी ने सब छीन लिया। अब बच्चे क्या करेंगे?”पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, कोई सुसाइड नोट नहीं मिलाओबरा थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि मौके पर पहुंचकर पंचनामा भराया गया। शव को डीएचओ ओबरा के पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है। मृतक के पास कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन पूछताछ में परिवार ने बीमारी और आर्थिक परेशानियों का जिक्र किया। पुलिस ने परिजनों का बयान दर्ज कर लिया है और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसपी सोनभद्र ने भी घटना की जानकारी ले ली है।ग्रामीणों में आक्रोश, सरकारी योजनाओं पर सवालइस घटना के बाद बीमारकुंडी गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाए। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा, “टीबी जैसी बीमारियों के लिए मुफ्त इलाज की स्कीम चल रही है, लेकिन गांव में डॉक्टरों की कमी और दवाइयों का अभाव है। ऐसे में गरीब मजदूर क्या करें?” स्थानीय एनजीओ ने भी परिवार को सहायता देने का ऐलान किया है। जिला प्रशासन से मृतक परिवार को आर्थिक मदद की मांग तेज हो गई है।यह घटना जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को उजागर करती है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की परेशानी में थाने पर संपर्क करें। आगे की जांच जारी है।






