तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होते ही आज से शराब की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 31 मार्च के बाद बचा हुआ स्टॉक भी अब नई दरों पर ही बेचा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। सरकार ने इस बार लाइसेंस फीस, एक्साइज ड्यूटी के साथ-साथ आयात-निर्यात और परिवहन शुल्क में बदलाव कर राजस्व बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
नई व्यवस्था के तहत देसी और विदेशी शराब की आपूर्ति के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। इसके लिए आबकारी आयुक्त को विशेष अधिकार दिए गए हैं, जिससे समय-समय पर कीमतों और सप्लाई सिस्टम में बदलाव किया जा सके।
कितनी बढ़ीं कीमतें? जानिए नई रेट लिस्ट
नई दरों के अनुसार प्रमुख ब्रांड्स की कीमतों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है—
ब्लेंडर प्राइड
180ml – ₹250
375ml – ₹490
750ml – ₹950
आर.एस. बैरल
180ml – ₹210
375ml – ₹410
750ml – ₹790
8 PM
180ml – ₹130
375ml – ₹250
750ml – ₹470
8 PM ब्लैक
180ml – ₹180
375ml – ₹350
आफ्टर डार्क
180ml – ₹160
375ml – ₹320
750ml – ₹620
आर.एस.
180ml – ₹190
375ml – ₹360
750ml – ₹690
VAT 69
180ml – ₹370
375ml – ₹750
750ml – ₹1470
वहीं देसी शराब (36% V/V) की नई कीमत ₹80 प्रति बोतल तय की गई है।
पैकेजिंग और सप्लाई में भी बड़ा बदलाव
नई नीति के तहत सिर्फ कीमतें ही नहीं बढ़ीं, बल्कि शराब की पैकेजिंग और सप्लाई सिस्टम में भी बदलाव किया गया है। अब रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय पदार्थ कांच की बोतलों के साथ-साथ कैन में भी उपलब्ध होंगे। इससे बाजार में विविधता बढ़ेगी और कंपनियों को भी नए विकल्प मिलेंगे।
उपभोक्ता पर बोझ, सरकार को फायदा
कीमतों में बढ़ोतरी से जहां आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, वहीं सरकार को इससे भारी राजस्व मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य की आय में वृद्धि होगी, लेकिन इसका असर उपभोक्ता खर्च पर साफ दिखाई देगा।
आगे और बदलाव संभव
आबकारी विभाग को दिए गए विशेष अधिकारों के चलते आने वाले समय में कीमतों और नियमों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में शराब बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
कुल मिलाकर, नई आबकारी नीति ने शराब के दामों में इजाफा कर दिया है, जिससे बाजार और उपभोक्ताओं दोनों पर असर पड़ना तय है। अब देखना होगा कि बढ़ी कीमतों के बीच मांग पर क्या असर पड़ता है और सरकार का राजस्व लक्ष्य कितना सफल होता है।






