तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – विजय कुमार
सोनभद्र के बीजपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने भीषण गर्मी के बीच स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। एनटीपीसी की बिजली वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बीजपुर, शांतिनगर, डोडहर और पुनर्वास क्षेत्र में बिजली आपूर्ति लगातार बाधित हो रही है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन इलाकों में रोजाना आठ घंटे से भी कम बिजली मिल रही है। कई बार स्थिति ऐसी होती है कि महज पांच मिनट बिजली देने के बाद आधे घंटे तक कटौती कर दी जाती है। लगातार हो रही इस बिजली कटौती से लोगों को भीषण गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी ने पहले शांतिनगर के लिए अलग ट्रांसफार्मर लगाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब प्रबंधन अपने वादे से पीछे हटता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि वर्ष 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीपीसी को क्षेत्र में बिजली और पानी की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज भी हालात संतोषजनक नहीं हैं।

बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में प्राकृतिक जल स्रोत पहले ही खत्म होते जा रहे हैं और अधिकांश लोग बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन लगातार बिजली कटौती के कारण पानी की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है। 43 डिग्री तापमान में महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बढ़ती गर्मी और बिजली संकट के चलते कई परिवार अपने बच्चों और परिजनों को दूसरे शहरों में भेजने को मजबूर हो रहे हैं। लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है और वे जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
वहीं इस पूरे मामले पर जब एनटीपीसी परियोजना प्रमुख से टेलीफोनिक बात की गई, तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बिजली कनेक्शनों की संख्या बढ़ने और ओवरलोडिंग की समस्या के कारण आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था को बिजली विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि भीषण गर्मी के इस दौर में बीजपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को नियमित बिजली और पेयजल की सुविधा कब मिलेगी? क्या प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएंगे, या फिर क्षेत्रवासियों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा





