
तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – दुद्धी सोनभद्र
इब्राहिम खान / राहुल चन्दन
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनुसूचित जनजाति के लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए शुरू की थी वन धन योजना
- योजना संचालन की जिम्मेदारी लौंगिक वन प्रभाग रेनुकूट ने दुद्धी आजीविका मिशन को सौंपी थी
- दुद्धी ब्लॉक के 300 महिलाओं ने 15 स्वयं सहायता समूह के माध्यम से वन धन योजना के तहत किए थे आवेदन
दुद्धी ब्लॉक के सभी 15 समूहों को मिलनी थी एक – एक लाख रुपये सहायता राशि अधिकारियों की लापरवाही से नही मिल सकी
आदिवासी जनजातियों को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाई गई वन धन योजना दुद्धी तहसील क्षेत्र में दम तोड़ती हुई नजर आ रही हैं।सोनभद्र जिले के तीन ब्लॉकों को शासन के निर्देश पर प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत चयन तो कर लिया गया लेकिन रेनुकूट वन निगम के अधिकारियों की लापरवाही से आज तक यह योजना मूर्त रूप नही ले सकी।जिससे आजीविका मिशन के 15 समूहों के करीब 300 महिलाएं रोजगार के आवेदन कर दर – दर भटकने को मजबूर हैं। आजीविका मिशन दुद्धी से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया है सन 2019 में प्रधानमंत्री वन धन योजना को सोनभद्र में संचालित करने के लिए वन निगम के द्वारा दुद्धी आजीविका मिशन को पत्र लिखा गया जिसमें सभी विवरण सहित सूची मांगी गई और आजीविका मिशन कार्यालय से 15 समूहों का चयन कर 300 महिलाओं की सूची रेनुकूट वन निगम को उपलब्ध करा दी गई।सूची के अनुसार आजीविका मिशन के 15 समूहों में एक – एक लाख रुपये की सहायता राशि भेजी जानी थी लेकिन सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी लौंगिक वन निगम रेनुकूट द्वारा आज तक समूहों को पैसे नही भेजें गए जिससे समूह के महिलाओं में आक्रोश व्याप्त है और आजीविका मिशन की महिलाएं आंदोलन की तैयारी में जुट गई हैं।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वन धन योजना की शुरुआत छत्तीसगढ़ के बीजापुर से की थी। वहां पर 25 लाख रुपए की लागत से वन धन विकास केंद्र की शुरुआत की थी। इस योजना को 14 अप्रैल 2018 को लॉन्च किया गया था। जनजातीय लोगों की आय बढ़ाने के लिए इस स्कीम का एलान किया गया था। जंगलों से मिलने वाली वन धन संपदा का सालाना मूल्य 2 लाख करोड़ रुपए है।
इसके तहत हर साल 30 हजार वन धन सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाने की योजना है। वहीं हर 15 सेल्फ हेल्प ग्रुप के क्लस्टर पर एक वन धन विकास केंद्र बनाया जाएगा।
वन धन विकास केंद्र के जरिए इन लोगों के बनाए प्रोडक्ट की पैकेजिंग और मार्केटिंग की जाएगी। इसे मौजूदा रिटेल नेटवर्क के जरिए किया जाएगा।
वन धन विकास केंद्र पर जनजातीय लोगों को ट्रेंड किया जाएगा। उनको जंगल से इकट्ठे किए गए अपने प्रोडक्ट की वैल्यू बढ़ाने के लिए वर्किंग कैपिटल दी जाएगी। जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में लोग अपने प्रोडक्ट न सिर्फ अपने राज्य में बल्कि उससे बाहर भी मार्केट कर सकेंगे। ट्रेनिंग और टेक्निकल सपोर्ट ट्रेफिड के जरिए दी जाएगी।
हर वनधन विकास केंद्र को 15 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस स्कीम के जरिए देश के 27 राज्यों के 307 आदिवासी जिलों में रहने वाले 5.5 करोड़ जनजातीय लोगों को सशक्त बनाने की योजना है। वन धन योजना के जरिए जनजातीय समुदायों को 50 गैर राष्ट्रीयकृत लघु वनोपजों के लिए उचित पारिश्रमिक और न्यूनतम मूल्य दिलाने पर भी काम होगा।





