खेल पदाधिकारी से हॉकी संघ के सचिव ने की डे बोर्डिंग सेंटर के प्रशिक्षक शैलेन्द्र की कार्यशैली की जाँच की मांग

तेज एक्सप्रेस न्यूज़ – संजय प्रसाद
श्री बंशीधर नगर- झारखंड

गढ़वा हॉकी संघ के सचिव संजय प्रताप देव ने जिला खेल पदाधिकारी को आवेदन देकर कुश्ती डे बोर्डिंग गढ़वा के प्रशिक्षक व खिलाड़ी के मनमानी रवैया से संबंधित शिकायत की है। जिला खेल पदाधिकारी को दिए गए आवेदन में संजय प्रताप देव ने कहा है कि गढ़वा में कुश्ती का डे बोर्डिंग सेंटर रामा साहू स्कूल के परिसर में स्थित इंडोर स्टेडियम में संचालित होता है।जिसके प्रशिक्षक शैलेंद्र पाठक हैं। शैलेंद्र पाठक प्रशिक्षक के अलावे गढ़वा जिला ओलंपिक संघ, बेल्ट रेसलिंग, ग्रप्पलिंग कुश्ती, साइकिल संघ समेत विभिन्न खेल संघों में जिला और राज्य संघ के विभिन्न पदों की जिम्मेवारी का निर्वहन करते हैं। अखबार के माध्यम से पता चला कि शैलेंद्र पाठक दिल्ली में साइकिलिंग संघ के बैठक में राज्य स्तरीय पदाधिकारी के हैसियत से शामिल हुए। उक्त समय डे बोर्डिंग का संचालन कौन कर रहा था। क्या यह नियमानुसार अवकाश लेकर वैसे बैठको या आयोजनों में शामिल होते हैं। अगर अवकाश भी लेते हैं तो अवकाश अवधि के माह के मानदेय का भुगतान किस प्रकार होता है। कोई प्रशिक्षक वर्ष में कितने दिन अवकाश में रह सकता है। क्या एक व्यक्ति एक साथ इतने खेलों की भूमिका का निर्वाहन न्यायोचित तरीके से कर सकता है। इसके अलावे शैलेंद्र पाठक को बेल्ट रेसलिंग संघ को चलाने के लिए जो कार्यालय आवंटित किया गया है। वह उन्हें किस नियम व शर्तों के तहत स्थाई रूप से आवंटित किया गया है।आवंटन से संबंधित उनकी और से जो पत्र दिखाई जाती है वह सही प्रतीत नहीं होता है। साथ ही अन्य खेल संघ भी इस बात को लेकर असंतुष्ट है। उन्होंने कहा है कि डे बोर्डिंग के खिलाड़ी तीन अक्टूबर को गढ़वा में हुई जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में भाग नहीं लिए तो उक्त सेंटर के संचालन का औचित्य क्या रह जाता है। वहीं दूसरी ओर सेंटर का खिलाड़ी कार्तिक कुमार सूबे के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर की ओर से कुश्ती के खिलाड़ियों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर सम्मान प्राप्त करते हैं। लेकिन दंगल में भाग नहीं लेता है। वही खिलाड़ी ग्रप्पलिंग कुश्ती में भाग लेने दिल्ली गया है। आखिर किसके आदेश पर वह दिल्ली खेलने गया है। उन्होंने कहा है कि उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रशिक्षकों व खिलाड़ियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

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