नाट्य काव्य का रूप हैं जो सुनने से हीं नहीं बल्कि देखने से भी रसानुभूति कराती होती हैं -विधायक हरिराम चेरों

दुद्धी – सोनभद्र

महुली (महुअरिया)स्थितश्री शंकर झंकार नाट्य कला समिति द्वारा पाँच दिवसीय नाटय कला का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में बतौर मुख्य दुद्धी विधायक हरि राम चेरो ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुरुआत किया।श्री चेरो अपने उद्बोधन में कहा कि नाटक काव्य का रूप है जो रचना सुनने से ही नही बल्कि देखने से भी दर्शकों के हृदय में रसानुभूति कराती है । नाटक में श्रव्य काव्य से अधिक रमणीकता होती है ।

विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे डॉ विनय श्रीवास्तव ने कहा कि ग्रामीण कलाकारों द्वारा आयोजित किये जाने वाले ऐसे कार्यक्रमों से आपसी भाई चारा को बल मिलता है तथा गांव के लोगों को मनोरंजन के साधन उपलब्ध होते है।
नाट्य कला परिषद के अध्यक्ष ग्राम प्रधान अरविन्द जायसवाल ने कहा कि इस अवसर पर हम अपनी ओर से सभी कलाकारों का तहे दिल से अभिनन्दन करते है तथा मेरा यह प्रयास रहेगा कि ग्रामीण क्षेत्रों के कलाकारों को सही एवम् उचित मंच मिल सके ताकि अपने कलाओं का बेहतर प्रदर्शन कर सकें। भारतीय सनातन संस्कृति में प्राचीन काल से अभिनय की एक परंपरा रही है, जो काव्य, नाट्य, हास्य और व्यंग के माध्यम से समाज में समरसता का भाव पैदा करना, संस्कृति का संरक्षण करना, और अपनी सनातन परंपरा को अक्कक्षुणय बनाए रखना हैं l

इस मौके पर कलामुद्दीन सिद्दिकी, मनोज भारती, बुन्देल चौबे, उदय शर्मा, शिवदास शर्मा,शमशाद आलम,लालमणी शर्मा, संजय जायसवाल, महेंद्र पूरी इत्यादि उपस्थित रहे।

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