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उन्नाव/ब्यूरो गायत्री शुक्ला
औरास के रामपुर गढ़ौवा सहित दर्जनों गांवों में दहशत की वजह बना बाघ तीसरे दिन भी नजर नहीं आया। तलाश में लापरवाही का आरोप लगा ग्रामीणों ने शनिवार सुबह 9 बजे रामपुर-औरास
मलिहाबाद मार्ग पर एक घंटे जाम लगा दिया।जिला वन अधिकारी ईशा तिवारी ने मौके पर पहुँच बाघ की तलाश में हर संभव प्रयास का आश्वासन दिया।छह टीमों ने 12 कि.मी क्षेत्र में बाघ की तलाश की लेकिन पैरों के निशान के अलावा कुछ नहीं मिला।ड्रोन से निगरानी शुरू की गई है।डीएफओ के अनुसार फिलहाल बाघ अब इस क्षेत्र में नहीं है।शुक्रवार को तीन किमी दायरे में बाघ के पंजे के 300 निशान मिलने के बाद शनिवार को एस.डी.ओ मयंक सिंह,दीपक श्रीवास्तव और आर.एन चौधरी की अगुवाई में छह टीमों ने सुबह आठ बजे से फिर तलाश शुरू की। डीएफओ ईशा तिवारी ने भी जंगल में घूमकर बाघ को तलाशा, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। ग्रामीणों के अनुसार सुबह चार बजे उन्होंने कई बार बाघ की दहाड़ सुनी है। फिर भी तलाश के नाम पर टीमें सिर्फ खानापूर्ति कर रही हैं।
डीएफओ ने ग्रामीणों से बात की तो सुरेश चौरसिया और प्रेम ने बताया कि वह सुबह खेत की तरफ गए थे। उन्हें सुरेश जायसवाल के सरसों के खेत में बाघ के होने की आहट भी सुनाई दी थी। टीम मौके पर पहुंची तो पास के धनीराम के खेत में बाघ के पंजे के निशान दिखाए। हालांकि डीएफओ ने निशान एक दिन पहले के होने की पुष्टि की। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए और जाम खोला। ग्राम प्रधान ओम प्रकाश ने पिंजरा लगाने की मांग की तो डीएफओ ने समझाया कि जब तक यह नहीं पता चलता कि बाघ कहां है तब तक पिंजरा कहां लगा दिया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाता कि बाघ यहां नहीं है, तब तक टीमें गांव में ही रहेंगीं और नियमित तलाश करेंगी।
बाघ के हमले से एक किसान की मौत और एक के घायल होने की घटना से दहशतजता ग्रामीण दूसरे दिन भी अपने खेतों की तरफ नहीं गए। कुछ किसान समूह में गए और फसल देखकर लौट आए। ग्रामीण अपने बच्चों को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं। घर से बाहर तक बच्चों की निगरानी करते रहे।डीएफओ ईशा तिवारी ने बताया कि बाघ 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है। एक रात में 30 से 40 किमी की दूरी तय कर सकता है। उन्होंने बताया कि रामपुर गढ़ौवा में किसानों पर हमला किए दो दिन बीत चुके हैं। इस दौरान दो रातों में बाघ सौ किमी तक जा सकता है। लखीमपुर और पीलीभीत के जंगलों में भी बाघ पाए जाते हैं। नहर किनारे के क्षेत्रों से होकर वहीं जाने की उम्मीद है। उन्नाव, हरदोई, सीतापुर और लखनऊ में टीमें नजर बनाए हैं।






