घोषण़ाओं को अमली जामा पहनाने मे हीलाहवाली करते अधिकारी

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ –

उन्नाव/ब्यूरो महेंद्र राज शुक्ल

यूँ तो किसी भी राजनैतिक दल के शासन काल मे जन हित के लिऐ बड़ी- बड़ी घोषणाएं राजनीतिक चलन मे आम बात हो गई है और यह भी सत्य है कि घोषण़ाओं पर क्रियान्वयन से उनको मूर्तरूप देने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारी गण़ व मंत्री गण़ों की भूमिका अहम होती है।फिर चाहे उनकी कार्य कुशलत से सरकार को श्रेष्ठता के उच्च शिख़र पर पहुँचाना हो या सरकार के ताबूत की आख़िरी कील।ताजा व एक लंबे अंतराल से चला आ रहा मामला प्रदेश की बड़ी विधान सभाओं मे से एक उन्नाव की भगवंत नगर वि.सभा का है।स्वाधीनता के प्रथम संग्राम से लेकर साहित्य व कला के क्षेत्रों मे भी बैसवारा (भगवंत नगर) ने देश को एक से बढ़कर एक नायाब रत्न दिऐ है।इसके बावजूद भी दुःखद पहलू यह है कि निर्माण़ाधीन फोर लेन मार्ग के अलावा क्षेत्र मे विकास की लकीर बीते कुछ वर्षो मे विकासील होने के स्तर को भी नही छू पाई है।हालात यह हैं कि कुछ ग्राम क्षेत्रों मे आज भी जीवन की मूल आवश्यकता बिजली व स्वच्छ पेयजल का आभाव क्षेत्रवासियों को पुरा पाषाण़ काल की अनुभूति कराता है।एक ओर जहाँ कुछ इलाकों मे बाधित विद्युत आपूर्ति (5-6 घंटा)की जा रही व सारा समय फाल्ट व रोस्टिंग की सूचना ही दी जा रही वही दूसरी ओर जीवन की मूल इकाई स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति भी ग्रामीण़ जनता के दयनीय जीवन की हकी़कत बयाँ करती है।बताते चलें कि ग्रामीण़ क्षेत्रों मे विद्युत आभाव को देखते हुऐ उ.प्र.जल निगम ने सौर ऊर्जा संचालित फिल्टर टंकियों की स्थापना का कार्य फर्म मे. विद्युत जैन को सौपा था और फर्म द्वारा दिसंबर माह के अंत व जनवरी माह मे सभी कार्यों को पूर्ण़ कर अधिसूचना के कारण़ चुनाव बाद जलापूर्ति किऐ जाने का आश्वासन भी दिया गया था।74 दिन बीत जाने पर भी जलापूर्ति नहीं की जा सकी है।एक या दो दिन खारे व निष्प्रयोज्य जल की आपूर्ति के बाद फर्म के माताहतों द्वारा आपूर्ति को बंद कर जल को जाँच के लिए भेंजा गया और जाँच के बाद आपूर्ति को पुनः आपूर्ति को सुचारू करने का आश्वासन दिया गया था जो कि अब तक न हो सकी है।फर्म के माताहतों से इस विषय मे बात करने पर उनका स्पष्ट जवाब था कि मेरी फर्म का भुगतान करा दो,कमीशन अधिक है और रिपोर्ट आने पर ही आपूर्ति होगी।फर्म के माताहत द्वारा यह भी कहा गया कि फर्म की पहुँच बहुत लंबी है व किसी भी प्रकार की कार्यवाही की उन्हें परवाह नही।इस बाबत अधिशासी अभियंता निर्माण खण्ड उ.प्र.ज.नि को भी करीब दो सप्ताह पूर्व विस्तृत सूचना दी जा चुकी है पर उनके द्वारा भी अब तक समुचित कार्यवाही नहीं की जा सकी है और स्थापित वाटर टैंक सिर्फ सरकारी धन का दुरुपयोग व ग्रामीणों के लिऐ सफेद हाँथी साबित हो रहे हैं।

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