तेज एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र जिले के कोन विकास खंड में मनरेगा योजनाओं के तहत किए गए कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप एक बार फिर उभरकर सामने आए हैं। ग्राम पंचायत रामगढ़ में फरवरी माह में बनरमुत्ता नाले पर बनाया गया जल अवरोधक (चेक डैम) कुछ ही महीनों में ढह गया, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और भुगतान के बाद विभागीय अधिकारियों ने जांच की औपचारिकता भर निभाई। उनका आरोप है कि बरसात के दौरान पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद अवरोधक में पानी नहीं रुका, जो निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।सूत्रों के अनुसार, गांव में इससे पहले भी तालाब में कोर वॉल निर्माण कार्य भुगतान से पहले ही गिर गया था। उस समय शिकायतें की गईं थीं, लेकिन विभागीय कार्रवाई के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कोन ब्लॉक क्षेत्र में कमीशनखोरी का खेल आम हो गया है, जहां अधिकारी और ठेकेदारों की मिलीभगत से मनरेगा के तहत घटिया निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। जांच समितियों पर खानापूर्ति करने का आरोप भी लगाया गया।इसी मामले में प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष लक्ष्मी कुमार जायसवाल ने सितंबर में मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और डीसी मनरेगा को पत्र भेजकर ब्लॉक विकास अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, डीसी मनरेगा ने उन्हें निराधार बताते हुए मामला शांत कर दिया था।स्थानीय लोगों ने अब रामगढ़ पंचायत में हुए दोनों निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। इस पर डीसी मनरेगा ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।






