तेज एक्सप्रेस न्यूज़ – किरण साहनी
सोनभद्र (घोरावल)दीपावली के पश्चात शिवद्वार में आयोजित शिवशक्ति लोक रंगमंच महोत्सव ने अपनी अलौकिक छटा और सांस्कृतिक आभा से शुक्रवार की सन्ध्या से लेकर अगली सुबह तक पूरी धरती को लोकसंस्कृति के रंगों में रंग दिया। लोकगीत, लोकनाट्य, गायन-वादन और पारंपरिक नृत्य विधाओं से ओतप्रोत यह आयोजन न केवल सोनभद्र की लोक परम्पराओं का उत्सव बना, बल्कि समर्पित विभूतियों के सम्मान और उनके स्मरण का भी सशक्त माध्यम रहा।संध्या बेला में आरम्भ हुए महोत्सव की शुरुआत दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण से हुई। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में सिद्ध सन्त पंडित शीतला प्रसाद शुक्ल चिर स्मृति सम्मान पूर्व जिला पंचायत सदस्य अमरनाथ सिंह चौधरी को प्रदान किया गया। वहीं भोजपुरी कविसम्राट मुंशी मंगललाल चिर स्मृति सम्मान कवि परमहंस सिंह चंदौली को अर्पित किया गया। दोनों ही विद्वान विभूतियों का सम्मान ब्लॉक प्रमुख संजय सिंह एवं जिला पंचायत सदस्य नीरज कुमार श्रीवास्तव द्वारा अंगवस्त्र, सपात्र नारिकेल, स्मृतिचिह्न और सम्मानपत्र देकर किया गया।इसके अतिरिक्त आयोजक मंडल ने अपने उत्कृष्ट योगदान हेतु ब्लॉक प्रमुख संजय यादव और जिला पंचायत सदस्य नीरज कुमार श्रीवास्तव को अंगवस्त्र, स्मृतिचिह्न व सपात्र नारिकेल भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने लोक परम्पराओं के संरक्षण में सतत योगदान दिया है।मंचस्थ रहे समिति के अध्यक्ष मुन्नर यादव और संरक्षक डॉ. परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव ‘पुष्कर’ ने आयोजक दल के साथ अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत किया। लोकविधाओं के जीवंत प्रदर्शन के दौरान सोनभद्र की विलुप्तप्राय परम्पराएं कर्मा, कोलदहकी, शैला और नटुआ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामबली कोल की मंडली ने पारंपरिक कोलदहकी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जबकि शिवनारायण गिरिया की टीम ने कर्मा नृत्यगीत को विभिन्न लोकभाषाओं में प्रस्तुत कर सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया।लोकगायन की श्रृंखला में प्रदेश व पड़ोसी राज्यों से आए दर्जनों कलाकारों ने संस्कृति की सरिता बहाई। कवि मुरेश, सोहन मौर्य, कैलाश भारती, राजकुमारी गुप्ता, श्यामवीर यादव, रामधनी विश्वकर्मा, गजानंद पांडे, कमलेश प्रजापति, कवि मुन्नर यादव, जगबन्धन पाल, हरिप्रसाद प्रजापति, लवकुश कुमार सहित अनेक कलाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को भावविभोर किया। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के लोकगायकों की सक्रिय सहभागिता ने महोत्सव को बहुरंगी आयाम प्रदान किया।कार्यक्रम का संचालन हीरापति यादव और शेषधर पाल ने दो सत्रों में प्रभावी ढंग से किया। स्वागत उद्बोधन में संरक्षक डॉ. परमेश्वर दयाल ‘पुष्कर’ ने सोनभद्र की सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि आभार प्रकट करते हुए अध्यक्ष मुन्नर यादव ने सभी अतिथियों और स्थानीय नागरिकों का अभिनंदन किया।महोत्सव में अपर जिलाधिकारी बागीश शुक्ल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंच पर जिला पंचायत सदस्य नीरज कुमार श्रीवास्तव, ब्लॉक प्रमुख संजय यादव, लवकुश कुमार गुप्त, दयाशंकर रौनियार, देवचरन यादव, लोकपति पटेल सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे जिन्होंने लोकविधाओं का रसास्वादन किया और प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।रात्रि से भोर तक चले इस लोक रंगमंच महोत्सव ने न केवल सोनांचल की विलुप्त होती लोक विधाओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश भी दिया। शिवद्वार की पावन धरती पर संस्कृतियों का यह उत्सव सद्भाव, परम्परा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया।
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