विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग पवन कुमार सिंह, एडवोकेट

तेज एक्सप्रेस न्यूज़ – किरण साहनी

सोनभद्र, 23 अक्टूबर।पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए संघर्षरत पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव अधिवक्ता पवन कुमार सिंह ने केंद्र सरकार से अपील की है कि सोनभद्र जिले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा एक केंद्रीय विश्वविद्यालय (सोन विश्वविद्यालय) की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा कि सोनभद्र का भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि से पिछड़ा इलाका चिकित्सा और उच्च शिक्षा सुविधाओं से कोसों दूर है, इसलिए इस क्षेत्र में ऐसे संस्थानों की स्थापना अत्यंत आवश्यक है।अधिवक्ता पवन कुमार सिंह ने बताया कि सोनभद्र जनपद की सीमाएँ बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से लगती हैं। यह क्षेत्र मुख्य रूप से पहाड़ी, आदिवासी और ग्रामीण अंचलों से घिरा हुआ है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं और उच्च शिक्षा संस्थानों का गंभीर अभाव है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नई दिल्ली स्थित एम्स में 2027 से पहले कोई तिथि उपलब्ध नहीं है, जिससे गंभीर मरीजों को इलाज के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में सोनभद्र जैसे जनपद में एम्स की स्थापना से न केवल स्थानीय बल्कि सीमावर्ती प्रदेशों के लाखों लोगों को भी राहत मिलेगी।उन्होंने कहा कि एम्स जैसी चिकित्सा संस्थाएं कम खर्च में उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जानी जाती हैं। ऐसे अस्पताल के खुलने से आदिवासी और गरीब मरीजों को राजधानी या अन्य राज्यों के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वहीं, केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना से यहाँ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा अपने ही जिले में प्राप्त हो सकेगी। इससे पलायन पर रोक लगेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।पवन कुमार सिंह ने कहा कि सोनभद्र पूर्वांचल का द्वार कहा जाता है, जहां प्राकृतिक संपदाएँ और औद्योगिक इकाइयाँ तो बहुत हैं, परंतु शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास की कमी रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस आदिवासी और भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जनपद को प्राथमिकता देते हुए एम्स और केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में शीघ्र पहल की जाए।जनमोर्चा के नेता ने कहा कि यदि केंद्र सरकार सोनभद्र में इन दोनों संस्थानों की स्थापना करती है, तो यह कदम पूरे पूर्वांचल और सीमावर्ती राज्यों के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। इससे लोगों को न केवल सस्ते और उच्चस्तरीय इलाज की सुविधा मिलेगी, बल्कि सोनभद्र शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नया केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री इस दिशा में सार्थक निर्णय लेंगे।

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