तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र। बुधवार की सुबह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सफाई कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पूर्ण हड़ताल की घोषणा कर दी। वेतन भुगतान में लगातार तीन माह की देरी से नाराज कर्मियों ने अस्पताल के एल-2 गेट पर जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। अचानक हुए इस आंदोलन से पूरे परिसर और वार्डों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई, जिससे अस्पताल की स्वच्छता गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है। चारों ओर गंदगी का अंबार लगने से मरीजों और तीमारदारों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि निजी ठेका कंपनी के अधीन कार्यरत होने के बावजूद उन्हें महीनों से वेतन नहीं मिला है। उनके अनुसार वर्तमान में उन्हें मात्र 7800 रुपये मासिक वेतन दिया जाता है, जो बढ़ती महंगाई को देखते हुए नाममात्र है। कर्मचारियों ने तीन माह का लंबित वेतन तुरंत भुगतान करने, न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने, नियमित पे स्लिप उपलब्ध कराने और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की है।सफाईकर्मी राममनोरथ, दिनेश और शिवकुमारी ने बताया कि तीन माह से वेतन न मिलने के कारण उनके परिवार आर्थिक संकट में हैं। बच्चों की पढ़ाई रुकने और खाने-पीने की वस्तुएं जुटाने में भी कठिनाई हो रही है। उन्होंने कहा कि वे अब भुखमरी की स्थिति में पहुंच चुके हैं। प्रदर्शनकारी कर्मियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी जायज मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।प्रदर्शन के दौरान आशा, राजेंद्र प्रजापति, श्यामलता, लीलावती, कलावती, अनीता, शेषमणि, कमली, अवधेश, बसुही, शिवकुमार, लल्लन और पंकज समेत चालीस से अधिक सफाईकर्मी उपस्थित रहे। कर्मियों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन और निजी ठेका कंपनी समय से वेतन देने में बार-बार लापरवाही कर रही है, जिससे कर्मचारियों का जीवन संकट में है।हड़ताल के कारण मेडिकल कॉलेज के सभी वार्डों में गंदगी फैल गई है। मरीजों और उनके स्वजनों को बदबू और अस्वच्छ वातावरण के बीच रहना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से देर शाम तक किसी अधिकारी ने कर्मचारियों से वार्ता नहीं की थी। इससे नाराज सफाई कर्मचारी अपने आंदोलन को और तेज करने की तैयारी में हैं।इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो मेडिकल कॉलेज की दैनिक सेवाएं ठप होने का खतरा और बढ़ सकता है।






