धर्म की हानि हो या ग्लानि—भगवान अवश्य लेते हैं अवतार : मनीष शरण जी महाराज

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी

सोनभद्र।गायत्री भवन तेजनगर उरमौरा, रॉबर्ट्सगंज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को कथा स्थल भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। अयोध्या धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक मनीष शरण जी महाराज ने भागवत कथा सुनाते हुए धर्म, हानि और ग्लानि के गूढ़ अर्थों को अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली उदाहरणों के माध्यम से श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत किया।
कथा के दौरान महाराज ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और जब-जब धर्म की ग्लानि होती है, दोनों ही परिस्थितियों में भगवान अवतार लेते हैं। उन्होंने हानि और ग्लानि के अंतर को समझाते हुए कहा कि यदि कोई बच्चा माता-पिता द्वारा दिए गए पैसे बाजार में खो दे, तो यह हानि कहलाती है, लेकिन यदि वही बच्चा उन पैसों का दुरुपयोग कर अनुचित कार्य करे, तो माता-पिता को ग्लानि होती है। इसी प्रकार समाज में जब धर्म का नाश होता है या धर्म का दुरुपयोग होता है, तब भगवान स्वयं अवतार लेकर व्यवस्था को सुधारते हैं।
महाराज ने रामचरितमानस की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा—
“जब जब होहिं धरम कै हानी, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी।
तब तब धरि प्रभु विविध शरीरा, हरहिं कृपा निधि सज्जन पीरा।”
उन्होंने गीता के श्लोक “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…” का भावार्थ समझाते हुए बताया कि अधर्म के बढ़ने और सज्जनों के कष्ट को दूर करने के लिए भगवान स्वयं प्रकट होते हैं।
कथा में भगवान के अवतार के अन्य कारणों को भी विस्तार से बताते हुए महाराज ने कहा—
“विप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार”, अर्थात ब्राह्मणों, गौ माता, देवताओं और संतों की रक्षा तथा लोक कल्याण के लिए ही भगवान मनुष्य रूप में अवतार लेते हैं।
कथा के मुख्य यजमान वरिष्ठ अधिवक्ता पवन मिश्र पत्नी सहित सपरिवार कथा श्रवण में उपस्थित रहे। इस अवसर पर अम्बरीष जी (राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विश्व हिंदू परिषद), नीरज सिंह, विनोद चौबे, पद्माकर द्विवेदी, करुणाकर द्विवेदी, दिनानाथ पांडे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं बच्चे मौजूद रहे। कथा स्थल पर पूरे समय भक्ति भाव और जयकारों का वातावरण बना रहा।

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