पूर्णाहुति के साथ इंद्रदेव की मेहरबानी, झमाझम बारिश से गदगद हुए किसान,आज से खेतों में गूंजेगी धान रोपाई की रौनक

तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – प्रमोद कुमार

दुद्धी सोनभद्र।विकास खंड क्षेत्र के महुली एवं पोलवा गांव में बुधवार को सदियों पुरानी लोक आस्था और कृषि संस्कृति का अनुपम पर्व तीन साला पूजा पूरे श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। राजा बरियार शाह डिहवार एवं बूढ़ी माई की आराधना के लिए दोनों गांवों के श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। गांव की सुख-समृद्धि, समय पर वर्षा, भरपूर पैदावार, पशुधन की रक्षा और जनकल्याण की मंगलकामना के साथ आयोजित इस विशेष पूजा ने एक बार फिर ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की।
महुली गांव में ग्राम प्रधान अरविंद जायसवाल तथा पोलवा गांव में ग्राम प्रधान राकेश गुप्ता के नेतृत्व में ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से दोपहर लगभग दो बजे पूजा-अर्चना संपन्न हुई। गांव के बैगा ने वैदिक एवं पारंपरिक विधि-विधान से राजा बरियार शाह डिहवार और बूढ़ी माई की पूजा कर गांव की खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की। पूजा में दोनों गांवों के प्रत्येक परिवार की सहभागिता ने इस आयोजन को सामाजिक समरसता का महापर्व बना दिया।
सबसे भावुक और रोमांचकारी क्षण तब आया, जब पूजा की पूर्णाहुति होते ही आसमान में काले बादल उमड़ पड़े और इंद्रदेव की कृपा से मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बारिश की बूंदों ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। ग्रामीणों ने इसे देव आशीर्वाद मानते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही मान्यता आज भी अक्षुण्ण है। बारिश के साथ ही गांव में खुशी का माहौल बन गया और किसानों ने खेतों की ओर रुख करने की तैयारी शुरू कर दी। अब गुरुवार से धान की रोपाई, मक्का की निराई-गुड़ाई एवं खरीफ फसलों के अन्य कृषि कार्य पूरे उत्साह के साथ प्रारंभ होंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि तीन साला पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव की आत्मा, लोक संस्कृति और कृषि जीवन का सबसे बड़ा पर्व है। यह परंपरा गांव के लोगों को एक सूत्र में बांधती है और नई फसल के शुभारंभ का संदेश देती है। इस आयोजन में हर वर्ग, हर परिवार और हर आयु के लोग अपनी सहभागिता निभाकर गांव की एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
पूजा के दौरान बैगा, रामदेव गौड़, इंद्रदेव कन्नौजिया, दिलगज राम, मनोज कुमार, विनोद कुमार, बुधनाथ, राजबली कन्नौजिया सहित गांव के सम्मानित सदस्य एवं सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धा, आस्था, परंपरा और प्रकृति के अद्भुत संगम से पूरा महुली और पोलवा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया।

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