काले जादू से आराम ओर ग्रह दोष को शांत करने के लिए मां धूमावती जी का माला मंत्र –

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तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – विष्णु गुप्ता

आप सभी को मेरा नमस्कार आज मै आपको मां धूमावती जी का माला मंत्र साधना बताने जा रहा हूं। जिन लोगों को लगता है उन पर या उनके किसी करीबी रिश्तेदार पर किसी के द्वारा तांत्रिक क्रियां की हुई है वो इस नवरात्रि में इस माला मंत्र के नित्य २०८ पाठ करे एक ही समय निर्धारित रखे रोज का ।

ओर इस माला मंत्र को सिद्ध कर ले पूरी नवरात्रि करके आप स्वयं बहुत लाभ अनुभव करेंगे।मंत्र का प्रयोग कैसे करना है ये आपको आगे बताऊंगी।आज माला मंत्र के बारे में बता रही हूं।तो आइए मां धूमावती जी का माला मंत्र जानिए।

मां धूमावती माला मन्त्र

ॐ धूं धूमावति चतुर्दश भुवननिवासिनि सकल

ग्रहोच्चाटनि सकलशत्रु रक्तमांसभक्षिणि,

मम शरीररक्षिणि भूतप्रेत पिशाचब्रह्मराक्षसादि सकलग्रहसंहारिणि मम

शरीर परमन्त्र-परतन्त्र-परयन्त्र-परतन्त्रनिवारिणि आत्ममन्त्रयन्त्रतन्त्र प्रकाशिनि मम

शरीरे परकट्टु-परवाटु-परवेट्टु-परजप-परहोम-परशून्य-परवृष्टि-

परकौतुक-परौषधादिच्छेदिनि-चिट्टेरि-

काहेरि-कन्नेरि-पाट्टेरि शुनककाट्टेरि-प्ररिटिकाट्टेरि-

दर्भकाट्टेरि-पातालकाट्टेरि-सकलजातिकाट्टेरि-ग्रहच्छेदिनि-मम

नाभि-कमलस्थान-संचारग्रहसंहारिणि धूम्रलोचनि

उग्ररूपिणि सकलविषच्छेदिनि सकलविषसंचयान

नाशय नाशय मारय मारय

विषमज्वर-तापज्वर-शीतज्वर-वातज्वर-लूतज्वर-

पयत्यज्वर-श्लेष्म ज्वर-मोहज्वर-सान्निपातज्वर-पातालकाट्टेरी ज्वर-प्रेतज्वर

पिशाचज्वर-कृत्रिमज्वर-नानादोषज्वर-सकलरोगनिवारिणि सकलग्रहच्छेदिनि शिरःशूलाक्षिशूल-कुक्षिशूल कर्णशूल-नाभिशूल-कटिशूल-

पार्श्वशूल-गण्डशूल-गुल्मशूलांगशूल-सकलशूलान् निधूमय सकलग्रहान्

निवारय निवारय रां रा रां रां रां क्ष्रां क्ष्रां क्ष्रां क्ष्रां क्ष्रां

खैं खैं खैं खैं खैं ध्रूं ध्रूं ध्रूं ध्रूं ध्रूं

फ्रें फ्रें फ्रें फ्रें फ्रें धूं धूं धूं धूं धूं

धूमावती मां रक्ष रक्ष शीघ्रं

शीघ्रमागच्छागच्छ क्षिप्रमेवारोग्यं

कुरु कुरु हुम् फट

धूं धूं धूं धूमावती स्वाहा ||

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