तेज़ एक्सप्रेस न्यूज़ – नंदकिशोर गुप्ता
विंढमगंज/सोनेभद्र। थाना क्षेत्र में कई जगहों पर नवरात्र के नौवां दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा कस्बे सहित ग्रामीण अंचलों में चल रहे नवरात्र के नवें दिन क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर मां काली पीठ मंदिर, सीतामोड़ दुर्गा पूजा समिति, श्री राम मंदिर दुर्गा पूजा समिति, मुड़ीसेमर नवयुवक दुर्गा पूजा समिति तथा अन्य स्थानों पर बहुत ही दर्शनीय मां दुर्गा की झाकियां सजी हुई है, पंडालों में मातारानी की नवें स्वरूप के पूजन के बाद हवन का कार्यक्रम हुआ। नवरात्र के नवें दिन मातारानी के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा अर्चना की गयी। मातारानी का यह महालक्ष्मी का ही स्वरूप है। क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर माता रानी की प्रतिमा की पूजन अर्चन के बाद सर्वप्रथम नौं कन्याओं को भोजन कराकर भंडारे की सुरुआत की। विंढमगंज बाजार स्थित मां काली पीठ दुर्गा पूजा समिति मंदिर में कमेटी के तत्वाधान में स्थानीय लोगों के द्वारा प्रसाद का व्यवस्था एवं महाप्रसाद भंडारा अशोक जायसवाल, पप्पू जायसवाल, डबलू जायसवाल, अरुण जायसवाल, बनारसी जयसवाल, सियाराम गुप्ता होटल, गुजराती सेठ, आशीष कांस्यकार, विजय यादव, अनिल चौरसिया, प्रधान प्रतिनिधि अभिषेक प्रताप सिंह, संजय गुप्ता प्रधान प्रतिनिधि, इन लोगो के द्वारा आयोजन किया गया जिसमें कमेटी के युवाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। अष्टमी तिथि को रात्रि में डांडिया नृत्य की प्रस्तुती स्थानीय महिलाओं एवं युवाओं ने किया।
माँ सिद्धिदात्रि की पूजा नौंवे दिन की जाती है। ये देवी सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। उपासक या भक्त पर इनकी कृपा से कठिन से कठिन कार्य भी चुटकी में संभव हो जाते हैं। हिमाचल के नंदापर्वत पर इनका प्रसिद्ध तीर्थ है।
अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियां होती हैं। इसलिए इस देवी की सच्चे मन से विधि विधान से उपासना-आराधना करने से ये सभी सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।भगवान शिव ने भी इस देवी की कृपा से ये तमाम सिद्धियां प्राप्त की थीं। इस देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। इस देवी के दाहिनी तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बाईं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प है। इसलिए इन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है।इनका वाहन सिंह है और ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं।
(उपासना)विधि-विधान से नौंवे दिन इस देवी की उपासना करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ये अंतिम देवी हैं। इनकी साधना करने से लौकिक और परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।मां के चरणों में शरणागत होकर निरंतर उपासना करने से, इस देवी का स्मरण, ध्यान, पूजन करने से हम अमृत पद की ओर चले जाते हैं।भगवती सिद्धिदात्री का ध्यान, स्रोत कवच का पाठ करने से निर्वाण चक्र जागृत होता है, जिससे सिद्धि-ऋद्धि की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के नौवें दिन सिद्धदात्री की पूजा-पाठ करने से आपके कार्यों में आ रहे सारे व्यवधान समाप्त हो जाते हैं सारे मनोकामना की पूरी करती हैं।
इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष व नवरात्र की व्यवस्था मां काली पीठ दुर्गा पूजा समिति के कार्यकर्ताओं के देखरेख में संपन्न कराया जा रहा है वहां पर मौजूद लोगों ने दीपक गुप्ता, मुन्ना केसरी, सीपू जैसवाल, डीसी मद्धेशिया, मनोज गुप्ता, सोना साधु, बीए गुप्ता, गोलू तिवारी, मिशु जायसवाल, विवेक केसरी, विक्की मद्धेशिया, चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, रितिक गुप्ता,मोनू मद्धेशिया, शंकर मद्धेशिया एवं अन्य कार्यकर्ता लोग मौजूद रहे व वहीं पर स्थानीय प्रशासन सूर्यभान के नेतृत्व पीएसी व पुलिस के जवान चुस्त दुरुस्त दिखाई दिया। इत्यादि उपस्थित रहे।






