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केतार से प्रदीप चन्द्रवंशी की रिपोर्ट
केतार सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ चतुर्भुजी मंदिर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रामनवमी पूजा के उपलक्ष में वैदिक मंत्रोचार के बाद भव्य कलश यात्रा निकाली गई जिसमे हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां चतुर्भुजी मंदिर से बजार होते हुए मुख्य सड़क से पंडा नदी एवं ढंढ़रा नदी के संगम तट पर जय श्री राम, जय भोलेनाथ मां चतुर्भुजी की जयकारा लगाते हुए पहुंचे तत्पश्चात संगम तट पर वाराणसी से आए हुए विद्वान नीरज शास्त्री, प्रद्युमन शास्त्री, शिवनारायण शास्त्री व ठाकुर प्रवेश के द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना एवं वैदिक मंत्रोचार के साथ कलश पूजन कर जल भरा गया। जल लेकर सभी श्रद्धालु भक्त गण मुख्य सड़क से निमियाडीह होते हुए मां चतुर्भुजी मंदिर प्रांगण पहुंचे। इस दौरान मंदिर निर्माण कमिटी के संरक्षक रामविचार साहू ने कहा कि करोना काल खत्म होने के बाद कलश यात्रा में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया एवं काफी उत्साहित देखा गया। श्री साहू ने मेला कमिटी मंदिर निर्माण कमिटी को धन्यवाद देते हुए कहा कि कलश स्थापना के बाद नव दिवसीय दुर्गा सप्तशती पाठ का निर्वहन किया जाएगा। मंदिर निर्माण कमिटी के नव निर्वाचित अध्यक्ष सह मुखिया प्रमोद कुमार ने कहा कि इन नव रूपों को देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर महिषासुर को वध करने का निवेदन किया. शस्त्र धारण करके माता शक्ति संपन्न हो गई. कहते हैं कि नौ रूपों को प्रकट करने का क्रम चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चलता. इसलिए इन नव दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है.उन्हीने कहा कि कलश यात्रा के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद एवं शरबत पानी का व्यवस्था कमिटी के द्वारा किया गया है।
मौके पर संरक्षक रामविचार साहू, अध्यक्ष प्रमोद कुमार, सचिव हेमंत पाठक, कोषाध्यक्ष विनोद भगत, उपाध्यक्ष विमलेश कुमार उप सचिव प्रमोद मेहता, मीडिया प्रभारी ज्वाला कमलापुरी, वरिष्ठ सदस्य संजय पाल, बिंदु राम, पंकज कमलापुरी, मदन पटेल, महेंद्र पासवान, जयशंकर प्रसाद, आदित्य मेहता, दिलीप कुमार, मधुसुधन कमलापुरी, जितेंद्र कुमार बैठा, उदय विश्वकर्मा, रामप्रवेश ठाकुर उपस्थित थे।







