तेज़ एक्सप्रेस न्यूज – किरण साहनी
सोनभद्र।ओबरा नगर पंचायत क्षेत्र में कूड़ा प्रबंधन की लापरवाही अब जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। नगर के विभिन्न हिस्सों में फैला हुआ कूड़ा और प्लास्टिक का ढेर स्थानीय निवासियों को जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर कर रहा है।स्थानीय नागरिक राकेश केशरी की लिखित शिकायत के बाद मामला केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के संज्ञान में आया। शिकायत में बताया गया कि ओबरा तापीय परियोजना की भूमि से सटे सेक्टर-9 क्षेत्र में नगर का कूड़ा ट्रॉली द्वारा सड़क किनारे डंप किया जा रहा है। शिकायत को गंभीर मानते हुए बोर्ड ने जांच के आदेश जारी किए हैं।बढ़ते प्रदूषण से लोगों में चिंतास्थानीय लोगों ने बताया कि कूड़े के ढेर में प्लास्टिक और जैविक कचरे की भारी मात्रा के कारण लगातार दुर्गंध फैलती रहती है। बढ़ती गर्मी में इसमें स्वतः या जानबूझकर आग लगने से उठता धुआं पूरे क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित कर रहा है। यह जहरीली गैसें लोगों की आंखों, फेफड़ों और गले को प्रभावित कर रही हैं।मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा कचरापर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेताया है कि यह कचरा सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि मवेशियों के लिए भी घातक बन चुका है। सड़क किनारे चरती गायें अक्सर प्लास्टिक के साथ गंदा कूड़ा खा लेती हैं, जिससे गंभीर संक्रमण और कई बार मौत तक की स्थिति बन जाती है।खुलेआम हो रहा नियमों का उल्लंघनठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत किसी भी संस्था या व्यक्ति को सार्वजनिक स्थानों अथवा जल निकायों में कचरा फेंकने, जलाने या दफनाने की अनुमति नहीं है। नियम 4(1)(2) और 16(1)(ए) के तहत यह स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है कि वह इन प्रावधानों का सख्ती से पालन कराए। लेकिन ओबरा नगर पंचायत द्वारा इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवालक्षेत्रवासियों का आरोप है कि नगर पंचायत की उदासीनता ने “स्वच्छ भारत अभियान” की पूरी भावना को धूमिल कर दिया है। सड़क किनारे जमा कूड़ा न केवल शहर की सुंदरता को बिगाड़ रहा है बल्कि विषैली बदबू से लोगों का जीना मुश्किल कर रहा है।जनता की बढ़ती नाराज़गी और प्रशासन पर दबावउत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अब मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। सदस्य सचिव ने अधिकारियों को कहा है कि नियमानुसार कार्रवाई की जाए और शिकायतकर्ता को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि वे अब इस रास्ते से गुजरते समय रुमाल या गमछा बांधकर चलने को मजबूर हैं।ओबरा की यह स्थिति प्रशासन के लिए एक चेतावनी संकेत है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो यह न केवल नगर की हवा को और प्रदूषित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर स्थायी दुष्प्रभाव डालेगा।





